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मानसून का आधा सीजन बीता, राजस्थान में सामान्य से 11% कम बारिश; किसानों की बढ़ी चिंता

 

राजस्थान में मानसून का आधा सीजन यानी जून और जुलाई का महीना बीत चुका है, लेकिन इस बार बारिश का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। 31 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सामान्य से 11 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। कम बारिश के चलते किसानों, पशुपालकों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।

सामान्य से कम रही बारिश

मानसून की शुरुआत के बाद प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर कमजोर रहा। कुछ इलाकों में अच्छी वर्षा हुई, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के कारण राज्य का औसत प्रभावित हुआ। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई तक प्रदेश में कुल वर्षा सामान्य से 11 फीसदी कम रही है।

खेती पर पड़ सकता है असर

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से कई जिलों में बुवाई और फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। किसान अब अगस्त में अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि फसलों को पर्याप्त नमी मिल सके।

जलाशयों में भी कम हुई पानी की आवक

कम बारिश का असर बांधों, तालाबों और अन्य जलाशयों में पानी की आवक पर भी देखने को मिल रहा है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है।

अगस्त की बारिश पर टिकी उम्मीदें

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है। अगस्त और सितंबर में यदि अच्छी बारिश होती है तो वर्षा की कमी की भरपाई काफी हद तक हो सकती है। ऐसे में किसानों और आम लोगों की उम्मीदें अब आगामी मानसूनी दौर पर टिकी हुई हैं।

मौसम विभाग रख रहा नजर

मौसम विभाग प्रदेशभर की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और समय-समय पर पूर्वानुमान जारी कर रहा है। विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी अपडेट पर ध्यान देने और किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती करने की अपील की है।

फिलहाल, 31 जुलाई तक के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि राजस्थान में मानसून का पहला आधा सीजन सामान्य से कमजोर रहा है। अब अच्छी बारिश ही खेती, जलस्रोतों और पेयजल व्यवस्था को राहत दिला सकती है।