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ग्वालियर नगर निगम के इंजीनियर की रिटायरमेंट से पहले मुश्किलें बढ़ीं, एक दिन पहले की गलती ने खड़ा किया करियर पर सवाल

 

सरकारी नौकरी के 35-40 साल के सफर, रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले सम्मान और करीब 60 लाख रुपए के रिटायरमेंट फंड का इंतजार कर रहे ग्वालियर नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) सुशील कटारे के लिए आखिरी वक्त में मुश्किलें खड़ी हो गईं। रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले हुई एक घटना ने उनकी पूरी सेवा अवधि और भविष्य के लाभों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, सुशील कटारे नगर निगम में लंबे समय से कार्यरत थे और उनकी सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया पूरी होने वाली थी। लेकिन रिटायरमेंट से एक दिन पहले हुए एक मामले ने स्थिति बदल दी। अब विभागीय स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आगे की कार्रवाई पर मंथन चल रहा है।

रिटायरमेंट से पहले बदला घटनाक्रम

बताया जा रहा है कि जिस समय सुशील कटारे अपने सेवाकाल के अंतिम दिन पूरे करने वाले थे, उसी दौरान एक ऐसी गलती सामने आई, जिसके कारण उनके रिटायरमेंट लाभ प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

सरकारी कर्मचारियों को लंबी सेवा के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ मिलते हैं। ऐसे में अंतिम समय में किसी विवाद या कार्रवाई की स्थिति में इन लाभों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

करोड़ों की जिम्मेदारी वाले पद पर रहे अधिकारी

कार्यपालन यंत्री का पद नगर निगम में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर रहते हुए अधिकारी को निर्माण कार्यों, योजनाओं और तकनीकी मामलों से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां संभालनी होती हैं।

अब सामने आए मामले के बाद विभाग यह जांच कर रहा है कि आखिर रिटायरमेंट से ठीक पहले हुई गलती की प्रकृति क्या है और उसका प्रभाव कितना गंभीर है।

विभागीय कार्रवाई पर टिकी नजर

मामले के बाद नगर निगम प्रशासन की ओर से जांच और आगे की प्रक्रिया को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारी के रिटायरमेंट लाभों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

फिलहाल यह मामला नगर निगम में चर्चा का विषय बना हुआ है। लंबे सेवाकाल के बाद रिटायरमेंट के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे अधिकारी के लिए अब विभागीय जांच और कार्रवाई सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा कि इस मामले का असर उनके रिटायरमेंट लाभों पर कितना पड़ेगा।