ग्वालियर नगर निगम का मछलीघर बदहाल: ऑक्सीजन की कमी और नाले के पानी से बढ़ी परेशानी, मछलियों की मौत की शिकायत
ग्वालियर नगर निगम का मछलीघर इन दिनों कई समस्याओं से जूझ रहा है। जगह की कमी, तकनीकी खामियों और खराब व्यवस्थाओं के कारण यहां मछलियों की देखभाल करना चुनौती बन गया है। कृत्रिम ऑक्सीजन देने के बावजूद मछलियों की मौत की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
मछलीघर में आने वाले लोग भी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान को आकर्षण का केंद्र होना चाहिए, वहां सुविधाओं की कमी के कारण स्थिति खराब होती जा रही है।
छोटे एक्वेरियम और वेंटिलेशन की कमी
जानकारी के अनुसार, नगर निगम के मछलीघर में एक्वेरियम की संख्या कम है और उनकी क्षमता भी सीमित है। इसके अलावा परिसर में पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं होने से मछलियों को परेशानी होती है।
ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए कृत्रिम ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है, लेकिन इसके बावजूद मछलियों के मरने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
बारिश में नाले का पानी बन रहा परेशानी
मछलीघर की समस्या बारिश के दौरान और बढ़ जाती है। पास के नाले का पानी ओवरफ्लो होकर परिसर में भर जाता है, जिससे मछलियों और पूरे परिसर की व्यवस्था प्रभावित होती है।
दो दिन पहले भी नाले का पानी मछलीघर परिसर में भर गया था। इससे वहां गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति बन गई थी।
रखरखाव पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मछलीघर के नियमित रखरखाव और तकनीकी सुधार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मछलियों की सुरक्षा के लिए बेहतर फिल्ट्रेशन सिस्टम, पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था और जल निकासी की जरूरत है।
लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि मछलीघर को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए, ताकि यह फिर से आकर्षण का केंद्र बन सके।
सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, मछलियों के जीवित रहने के लिए पानी की गुणवत्ता, तापमान, ऑक्सीजन स्तर और साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। इन व्यवस्थाओं में कमी आने पर मछलियों की मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
अब देखना होगा कि नगर निगम इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है। मछलीघर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए जल्द सुधारात्मक कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।