गुना नगरपालिका में नामांतरण के मामले 900 पार, अतिरिक्त प्रभार के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
गुना नगरपालिका में नामांतरण प्रकरणों के निराकरण की व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। लंबित मामलों को कम करने के लिए राजस्व विभाग के पटवारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। नामांतरण के मामलों का निपटारा होने के बजाय लंबित प्रकरणों की संख्या बढ़कर 900 से अधिक हो गई है। इससे लोगों को अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेजी काम पूरे कराने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि नगरपालिका में लंबे समय से नामांतरण के प्रकरण लंबित चल रहे हैं। संपत्ति की खरीद-बिक्री, विरासत या अन्य कारणों से नामांतरण कराने के लिए लोग नगरपालिका में आवेदन करते हैं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रकरणों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से राजस्व विभाग के पटवारी को नामांतरण प्रकरणों के निराकरण का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। उम्मीद थी कि इससे लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
वर्तमान में नामांतरण के लंबित मामलों की संख्या 900 से ज्यादा पहुंच चुकी है। यानी अतिरिक्त व्यवस्था किए जाने के बाद भी लंबित प्रकरणों का दबाव कम नहीं हुआ है। इसके उलट आवेदनों की संख्या बढ़ने के साथ पेंडेंसी भी बढ़ती जा रही है। इससे नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
नामांतरण किसी भी संपत्ति के रिकॉर्ड में नए मालिक या उत्तराधिकारी का नाम दर्ज कराने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके पूरा होने के बाद ही संबंधित व्यक्ति का नाम नगरपालिका के संपत्ति रिकॉर्ड में दर्ज होता है। ऐसे में प्रकरणों के लंबे समय तक लंबित रहने से नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। संपत्ति से जुड़े अन्य कामों के लिए भी लोगों को नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ सकता है।
लोगों का कहना है कि आवेदन जमा करने के बाद उन्हें प्रकरण की स्थिति जानने के लिए नगरपालिका कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई मामलों में जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद प्रकरणों का समय पर निराकरण नहीं हो पाता। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
अब 900 से अधिक लंबित मामलों के कारण नगरपालिका प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जरूरत इस बात की है कि लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। साथ ही नए आवेदनों के साथ पुरानी पेंडेंसी का भी नियमित रूप से निराकरण किया जाए, ताकि नामांतरण व्यवस्था पटरी पर आ सके और नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिले।