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मध्य प्रदेश के महंगे शराब ठेकों का गुजरात कनेक्शन! स्टॉक खपाने के लिए बनाए 5 अवैध कॉरिडोर, जांच में खुलासा

 

मध्य प्रदेश में शराब के महंगे ठेकों का गणित अब गुजरात के ड्राई स्टेट से जुड़ता नजर आ रहा है। एक इन्वेस्टिगेशन में दावा किया गया है कि भारी कीमत पर शराब के ठेके लेने वाले कारोबारी अपना मुनाफा बढ़ाने और नुकसान कम करने के लिए अवैध तरीके अपना रहे हैं। आरोप है कि लाइसेंसी दुकानों के लिए खरीदा गया वैध शराब स्टॉक स्थानीय बाजार में पूरा नहीं बिकने पर दूसरे राज्यों में अवैध तरीके से भेजा जा रहा है। इसके लिए बाकायदा पांच नए कॉरिडोर तैयार किए जाने की बात भी सामने आई है।

इस पूरे मामले में शराब कारोबार के ठेकों, स्टॉक की उपलब्धता और उसकी बिक्री के बीच का गणित अहम बताया जा रहा है। ठेकेदारों को दुकानों के संचालन के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में स्थानीय बाजार में अपेक्षित बिक्री नहीं होने पर उनके सामने आर्थिक नुकसान का खतरा रहता है। इन्वेस्टिगेशन के मुताबिक, इसी नुकसान को कम करने और अतिरिक्त कमाई के लिए शराब को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने का कथित नेटवर्क तैयार किया गया है।

लाइसेंसी स्टॉक का अवैध इस्तेमाल करने का आरोप

जांच में सामने आए दावे के अनुसार, शराब की दुकानों के लिए खरीदा गया स्टॉक कागजों में वैध हो सकता है, लेकिन उसे निर्धारित बिक्री क्षेत्र से बाहर भेजना नियमों का उल्लंघन है। आरोप है कि कुछ बड़े ठेकेदार इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर शराब को दूसरे राज्यों में पहुंचा रहे हैं।

स्थानीय बाजार में शराब की पूरी बिक्री नहीं होने पर बचा हुआ स्टॉक ठेकेदारों के लिए आर्थिक बोझ बन सकता है। ऐसे में कथित तौर पर इस स्टॉक को दूसरे राज्यों में खपाने का रास्ता अपनाया जा रहा है।

गुजरात के ड्राई स्टेट से जुड़ा कारोबार

इस कथित नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण पहलू गुजरात से जुड़ा है। गुजरात में शराबबंदी लागू है। ऐसे में मध्य प्रदेश से शराब की अवैध आपूर्ति के आरोप इस पूरे मामले को और गंभीर बनाते हैं। इन्वेस्टिगेशन में दावा किया गया है कि शराब को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए पांच नए कॉरिडोर तैयार किए गए हैं।

पांच कॉरिडोर के जरिए सप्लाई का दावा

इन्वेस्टिगेशन के मुताबिक, शराब की कथित अवैध आवाजाही के लिए पांच अलग-अलग कॉरिडोर बनाए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन कॉरिडोर के रास्तों, उनमें शामिल लोगों और शराब की मात्रा का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।

यह मामला शराब ठेकों की नीलामी, स्टॉक के हिसाब-किताब और राज्यों के बीच शराब की आवाजाही पर निगरानी से जुड़े सवाल खड़े करता है। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित विभागों की कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है।