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चार साल पहले सड़क हादसे ने बदल दी गर्ग परिवार की जिंदगी: इकलौते बेटे पीयूष की मौत, पिता लंबे समय तक कोमा में रहे; अब दूसरों पर निर्भर

 

देवास जिले के चापड़ा-अमरपुरा के पास करीब चार साल पहले हुए एक सड़क हादसे ने गर्ग परिवार की पूरी जिंदगी बदलकर रख दी। इस दुर्घटना में परिवार के इकलौते बेटे पीयूष गर्ग की मौत हो गई थी, जबकि उनके पिता सुरेश चंद्र गर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद सुरेश चंद्र लंबे समय तक कोमा में रहे। जब उन्हें होश आया तो उनकी मानसिक स्थिति पहले जैसी नहीं रही। अब हालत यह है कि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परिवार के दूसरे सदस्यों पर निर्भर हैं।

यह हादसा गर्ग परिवार के लिए दोहरी त्रासदी लेकर आया। एक तरफ परिवार ने अपने इकलौते बेटे को खो दिया, वहीं दूसरी ओर बेटे को खोने के साथ पिता की जिंदगी भी पूरी तरह बदल गई। दुर्घटना में गंभीर चोट लगने के बाद सुरेश चंद्र को लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। कोमा में रहने के कारण उनकी स्थिति बेहद गंभीर बनी रही।

इकलौते बेटे की मौत का गहरा सदमा

पीयूष गर्ग परिवार के इकलौते बेटे थे। सड़क हादसे में उनकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटे से परिवार को भविष्य की उम्मीदें थीं, वह अचानक हमेशा के लिए दूर हो गया। हादसे के बाद परिवार के लिए सामान्य जिंदगी में लौटना बेहद मुश्किल हो गया।

वहीं, सुरेश चंद्र गर्ग भी दुर्घटना के बाद पहले जैसे नहीं रह सके। लंबे इलाज और कोमा से बाहर आने के बाद उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई। अब उन्हें कई सामान्य कामों के लिए भी दूसरों की सहायता की जरूरत पड़ती है।

चार साल बाद भी नहीं बदली स्थिति

हादसे को करीब चार साल बीत चुके हैं, लेकिन गर्ग परिवार के लिए उस दुर्घटना का असर आज भी खत्म नहीं हुआ है। पीयूष की कमी परिवार को लगातार महसूस होती है। दूसरी ओर सुरेश चंद्र की देखभाल भी परिवार के लिए रोजाना की जिम्मेदारी बनी हुई है।

सुरेश चंद्र की हालत के कारण परिवार के सदस्यों को उनकी जरूरतों का ध्यान रखना पड़ता है। खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा के दूसरे कामों में भी उन्हें सहायता की आवश्यकता होती है। परिवार के लिए यह स्थिति भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती बन चुकी है।

सड़क हादसे ने छीन ली सामान्य जिंदगी

चापड़ा-अमरपुरा के पास हुआ यह हादसा गर्ग परिवार के लिए केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि जिंदगी बदल देने वाली घटना साबित हुआ। एक ही हादसे में परिवार ने अपना इकलौता बेटा खो दिया और पिता की जिंदगी भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई।

चार साल बाद भी परिवार उस घटना से उबरने की कोशिश कर रहा है। पीयूष की यादें और सुरेश चंद्र की मौजूदा स्थिति हादसे के दर्द को आज भी ताजा कर देती हैं। यह घटना सड़क पर सावधानी और यातायात नियमों के पालन की जरूरत को भी सामने लाती है, क्योंकि एक सड़क दुर्घटना का असर केवल घायल या मृत व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार इसकी कीमत लंबे समय तक चुकाता है।