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महिला टीचर ने बच्ची को पीटा, कान का पर्दा फटा: छात्रा बोली- मैम ने थप्पड़ मारे, दर्द हो रहा; कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

 

राजस्थान में एक स्कूल की महिला शिक्षक पर छात्रा के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। परिजनों का कहना है कि शिक्षक की कथित पिटाई से बच्ची के कान में गंभीर चोट आई और उसका कान का पर्दा फट गया। घटना के बाद बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। मामले की शिकायत प्रशासन तक पहुंचने के बाद कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।

छात्रा ने बताया- मैम ने थप्पड़ मारे

घटना के बाद बच्ची ने परिजनों को बताया कि स्कूल में महिला टीचर ने उसे थप्पड़ मारे। छात्रा के अनुसार मारपीट के बाद उसके कान में तेज दर्द होने लगा और सुनने में भी परेशानी महसूस हुई। बच्ची की हालत देखकर परिजन उसे चिकित्सकीय जांच के लिए लेकर पहुंचे।

परिजनों का आरोप है कि बच्ची के कान की जांच में गंभीर चोट सामने आई। डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर कान का पर्दा फटने की बात सामने आने के बाद परिवार ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

बच्ची के परिजनों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक द्वारा छात्रा के साथ इस तरह मारपीट किया जाना बेहद गंभीर मामला है। उनका आरोप है कि यदि बच्ची को किसी बात पर समझाना था तो शिक्षक को बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करना चाहिए था। मारपीट के कारण बच्ची को शारीरिक चोट के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।

परिजनों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच में स्कूल में घटना के समय मौजूद लोगों के बयान लिए जा सकते हैं। साथ ही बच्ची के मेडिकल रिकॉर्ड और चिकित्सकीय रिपोर्ट को भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।

जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि छात्रा के साथ वास्तव में किस परिस्थिति में मारपीट हुई और उसकी कान की चोट किस कारण से आई।

स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस मामले में स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि घटना के समय स्कूल में निगरानी की व्यवस्था कैसी थी और घटना के बाद छात्रा को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई या नहीं।

यदि जांच में शिक्षक पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी रखते हैं। शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में शारीरिक हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदारी किसकी थी।