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फसल बीमा राशि नहीं मिलने पर किसानों का पैदल मार्च, झाबुआ कलेक्टर कार्यालय तक 50 किमी की पदयात्रा शुरू

 

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में फसल बीमा राशि का भुगतान नहीं होने से किसानों में भारी नाराजगी है। लंबे समय से बीमा क्लेम का इंतजार कर रहे किसानों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाया है। इसी के तहत पेटलावद क्षेत्र के बनी और रूपगढ़ गांव के किसानों ने मंगलवार सुबह झाबुआ कलेक्टर कार्यालय तक करीब 50 किलोमीटर का पैदल मार्च शुरू किया। किसानों का कहना है कि बार-बार मांग करने के बावजूद उन्हें अब तक फसल बीमा की राशि नहीं मिली, जिससे आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है।

मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में किसान अपने गांवों से पैदल रवाना हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर किसान सरकार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए झाबुआ की ओर बढ़े। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान के बाद उन्हें बीमा राशि मिलने की उम्मीद थी, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने से खेती और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

किसानों का आरोप है कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि लगातार आश्वासन तो मिले, लेकिन बीमा राशि अब तक उनके खातों में नहीं पहुंची। इसी कारण मजबूर होकर उन्हें पैदल मार्च करना पड़ रहा है।

आंदोलन में शामिल किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे। उनका उद्देश्य जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है, ताकि लंबित फसल बीमा राशि का जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती खेती की लागत, मौसम की मार और फसल नुकसान ने पहले ही उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है। ऐसे में बीमा राशि नहीं मिलने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि सरकार को किसानों के हित में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।

प्रशासन की ओर से फिलहाल किसानों के पैदल मार्च पर नजर रखी जा रही है। संभावना है कि झाबुआ पहुंचने पर किसान जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराएंगे। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

झाबुआ जिले में किसानों का यह पैदल मार्च अब चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों और किसान संगठनों की भी इस आंदोलन पर नजर है। किसानों को उम्मीद है कि उनके शांतिपूर्ण विरोध के बाद सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करेगा और लंबित फसल बीमा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।