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उर्दू अदब को बड़ा सदमा: मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन, वीडियो में जाने भोपाल में होंगे सुपुर्द-ए-खाक

 

उर्दू ग़ज़ल की दुनिया से गुरुवार को एक ऐसी आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई, जिसने दशकों तक मोहब्बत, दर्द, तन्हाई और इंसानी जज़्बात को अल्फ़ाज़ दिए। मशहूर शायर और उर्दू ग़ज़ल के शहंशाह डॉक्टर बशीर बद्र का भोपाल में निधन हो गया। उन्होंने गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत, उर्दू अदब और शायरी प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।

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डॉ. बशीर बद्र लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से जूझ रहे थे। तकरीबन 14 वर्षों से उनकी याददाश्त लगातार कमजोर होती जा रही थी। हालांकि बीमारी ने उनकी स्मृतियों को धुंधला कर दिया था, लेकिन उनके लिखे शेर आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। उनकी ग़ज़लें और अशआर मुशायरों से लेकर आम लोगों की जुबान तक में बसे हुए हैं। परिवार के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार आज शाम साढ़े 7 बजे भोपाल टॉकीज के पास स्थित कब्रिस्तान में किया जाएगा। उन्हें सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। साहित्य और कला जगत की कई बड़ी हस्तियों के उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना है।

पत्नी की आवाज़ में लौट आती थी यादों की चमक

डॉ. बशीर बद्र की पत्नी डॉक्टर राहत बद्र ने उनके जीवन के आखिरी वर्षों में हर पल उनका साथ निभाया। परिवार से जुड़े लोगों के अनुसार, जब राहत बद्र उनके मशहूर शेर गुनगुनाती थीं, तो बशीर साहब के चेहरे पर हल्की मुस्कान और ताजगी दिखाई देने लगती थी। कभी-कभी वह खुद भी अधूरा मिसरा पूरा करने लगते थे। यह पल परिवार के लिए बेहद भावुक होते थे।बीमारी के बावजूद शायरी से उनका रिश्ता कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। जब भी उन्हें पुराने मुशायरों की याद आती थी, तो वह धीरे-धीरे “इरशाद… इरशाद…” कहने लगते थे। यह वही आवाज़ थी, जिसने कभी देश-विदेश के मुशायरों में हजारों लोगों को मंत्रमुग्ध किया था।

मुशायरों की जान थे बशीर बद्र

एक दौर ऐसा था जब किसी बड़े मुशायरे में डॉ. बशीर बद्र की मौजूदगी को उसकी सफलता की गारंटी माना जाता था। उनकी ग़ज़लों में आम इंसान की जिंदगी, रिश्तों की गर्माहट और समाज की सच्चाइयों की झलक मिलती थी। उनकी शायरी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह बेहद आसान शब्दों में गहरी बात कह जाते थे।उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं। मोहब्बत और जिंदगी पर लिखे उनके अशआर ने उन्हें हर पीढ़ी में लोकप्रिय बनाया। उन्होंने उर्दू अदब को नई पहचान दी और ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुंचाया।

साहित्य जगत में शोक

डॉ. बशीर बद्र के निधन पर साहित्यकारों, शायरों और राजनीतिक हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर उनके चाहने वाले लगातार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि बशीर बद्र सिर्फ एक शायर नहीं, बल्कि एहसासों की आवाज़ थे।उनके जाने से उर्दू शायरी का एक सुनहरा अध्याय खत्म हो गया, लेकिन उनके शब्द हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।