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बड़नगर में बेशकीमती जमीन का फर्जी वारिस बनाकर नामांतरण, सरपंच के बेटे के नाम रजिस्ट्री का आरोप; मामला हाईकोर्ट पहुंचा

 

बड़नगर तहसील के जलोदिया गांव में दशकों से बिना किसी वारिस के खाली पड़ी जमीन को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि जमीन पर फर्जी वारिस खड़ा कर उसका नामांतरण कराया गया और इसके बाद वारिसाना प्रमाण पत्र जारी करवाकर जमीन की रजिस्ट्री उसी सरपंच के बेटे के नाम करा दी गई, जिसके स्तर से वारिसाना जारी किया गया था। मामला अब इंदौर हाईकोर्ट के समक्ष पहुंच गया है।

दशकों से खाली पड़ी थी जमीन

जानकारी के अनुसार जलोदिया ग्राम में एक जमीन लंबे समय से बिना किसी वारिस के खाली पड़ी थी। बताया गया कि जमीन के वास्तविक वारिस का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं था। इसी स्थिति का फायदा उठाकर जमीन को अपने नाम कराने की कथित साजिश रची गई।

आरोप है कि जमीन पर एक व्यक्ति को फर्जी वारिस के तौर पर प्रस्तुत किया गया। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड में उसका नाम दर्ज कराने के लिए नामांतरण की प्रक्रिया कराई गई।

वारिसाना जारी करने पर उठे सवाल

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि कथित फर्जी वारिस के आधार पर वारिसाना जारी किया गया। इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री उस व्यक्ति के नाम कर दी गई, जो वारिसाना जारी करने वाले सरपंच का बेटा बताया जा रहा है।

इस घटनाक्रम को लेकर जमीन के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड में किए गए बदलावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता पक्ष ने पूरे मामले की जांच और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए गए नामांतरण व रजिस्ट्री को चुनौती दी है।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

मामला अब इंदौर हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। याचिका में जमीन के नामांतरण, वारिसाना और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

मामले में अदालत के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल है कि जिस जमीन का कोई वारिस नहीं बताया जा रहा था, वहां अचानक वारिस कैसे सामने आया और उसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

अब पूरे मामले में राजस्व रिकॉर्ड, पुराने दस्तावेज, वारिसाना प्रमाण पत्र और रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और हाईकोर्ट की सुनवाई तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही जमीन के वास्तविक स्वामित्व और कथित फर्जीवाड़े की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।