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मानसून में भी पातालपानी के जंगलों में पतझड़ जैसा नजारा, सागवान के हजारों पेड़ों पर संकट

 

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में मानसून के दौरान भी पातालपानी, आंबाझर और आसपास के जंगलों में सागवान के पेड़ों पर संकट दिखाई दे रहा है। बारिश के मौसम में जहां जंगलों में हरियाली छाई रहती है, वहीं इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सागवान के पेड़ों की पत्तियां पहले पीली और जालीनुमा हो रही हैं। इसके बाद पत्तियां सूखकर झड़ रही हैं। इससे कई हिस्सों में सावन के बजाय पतझड़ जैसा नजारा दिखाई दे रहा है।

हजारों पेड़ों की पत्तियां हो रहीं खराब

जंगल क्षेत्र में सागवान के पेड़ों की पत्तियों में असामान्य बदलाव देखा जा रहा है। पहले पत्तियां पीली पड़ती हैं और उन पर जालीनुमा निशान दिखाई देने लगते हैं। कुछ समय बाद पत्तियां सूखकर पेड़ से गिर जाती हैं।

बड़ी संख्या में पेड़ों पर एक साथ इस तरह के लक्षण दिखाई देने से वन क्षेत्र की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। मानसून के दौरान पेड़ों पर नई और हरी पत्तियां आने के बजाय सूखी पत्तियां दिखाई दे रही हैं।

सावन में पतझड़ जैसा नजारा

पातालपानी और आंबाझर क्षेत्र के जंगल सामान्य तौर पर बारिश के मौसम में घने और हरे-भरे दिखाई देते हैं। लेकिन इस बार कई हिस्सों में पेड़ों की पत्तियां झड़ने के कारण जंगल का दृश्य बदला हुआ नजर आ रहा है।

स्थानीय लोगों और जंगल क्षेत्र में आने वाले लोगों ने भी इस बदलाव को महसूस किया है। मानसून में सूखे पेड़ों और झड़ती पत्तियों का नजारा लोगों के लिए असामान्य है।

पेड़ों पर बीमारी या कीट का असर होने की आशंका

सागवान की पत्तियों के पीले पड़ने और जालीनुमा होने के पीछे किसी बीमारी या कीट के प्रकोप की आशंका जताई जा सकती है। हालांकि वास्तविक कारण की पुष्टि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

यदि किसी कीट या रोग के कारण बड़ी संख्या में पेड़ों की पत्तियां प्रभावित हो रही हैं तो समय रहते इसकी पहचान जरूरी है। वन विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ों की जांच कराकर कारणों का पता लगाना होगा।

वन विभाग के सामने चुनौती

सागवान मध्य प्रदेश के प्रमुख वन वृक्षों में शामिल है। ऐसे में हजारों पेड़ों में एक साथ पत्तियों के खराब होने की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वन विभाग के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि समस्या कितने क्षेत्र में फैली है और इसका असर पेड़ों की वृद्धि पर कितना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों की मदद से प्रभावित पेड़ों की पत्तियों और मिट्टी के नमूनों की जांच कराई जा सकती है। इससे बीमारी, कीट या मौसम से जुड़े किसी अन्य कारण की पहचान करने में मदद मिलेगी।

समय रहते निगरानी जरूरी

अगर समस्या का कारण किसी संक्रमण या कीट का प्रकोप निकलता है तो प्रभावित क्षेत्र में समय रहते नियंत्रण के उपाय जरूरी होंगे। लगातार निगरानी से यह पता लगाया जा सकेगा कि समस्या नए क्षेत्रों में फैल रही है या नहीं।

फिलहाल मानसून के मौसम में पातालपानी, आंबाझर और आसपास के जंगलों में सागवान की पत्तियों का इस तरह सूखकर गिरना चिंता का विषय बना हुआ है। वन विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इसके पीछे प्राकृतिक कारण हैं, मौसम का असर है या किसी कीट और बीमारी का प्रकोप।