आदिवासी इलाकों में 27 मौतों के बाद भी नहीं थम रही बच्चों की बीमारी, 24 घंटे में 132 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे
मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में बच्चों के बीमार होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जून के अंतिम सप्ताह से अब तक 27 लोगों की मौत के बाद भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले 24 घंटे में ही जिला अस्पताल में 132 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे। बड़ी संख्या में बच्चों के अस्पताल पहुंचने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, जिले के बैहर और परसवाड़ा क्षेत्र के आदिवासी गांवों में बड़ी संख्या में बच्चे बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। मछुरदा, अडोरी, सोनगुड्डा, मोहनपुर, कोरका और कुंडेकसा सहित कई गांवों से बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया जा रहा है। इनमें कई बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
जून के अंतिम सप्ताह से आदिवासी इलाकों में लगातार मौतों का सिलसिला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाई है। हालांकि, इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी का प्रकोप पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाया है। लगातार नए मरीज सामने आने से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है।
पिछले 24 घंटे में 132 बच्चों के जिला अस्पताल पहुंचने से अस्पताल में भीड़ बढ़ गई। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की जांच और उपचार के लिए चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों को अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सीमित होने के कारण बीमार बच्चों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। कई परिवार अपने स्तर पर वाहनों की व्यवस्था कर बच्चों को जिला अस्पताल तक लेकर पहुंच रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर बीमारियों के कारणों का पता लगाने और मरीजों की जांच करने में जुटी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने के साथ गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
बच्चों में बीमारी फैलने के कारणों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की निगरानी में जांच की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल गंभीर रूप से बीमार बच्चों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना और प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण या बीमारी के संभावित कारणों को नियंत्रित करना है।
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं और दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही गंभीर बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए तत्काल परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
27 मौतों के बाद भी 132 बच्चों का 24 घंटे में अस्पताल पहुंचना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। अब स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमारी के वास्तविक कारण का पता लगाकर उसे जल्द नियंत्रित करना और प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।