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अहंकार जला, आसमान जगमगाया... शहर में 25 से अधिक स्थानों पर 40 से 105 फीट के रावण के पुतलों का दहन

 

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व शहर में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 25 से अधिक स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। अलग-अलग स्थानों पर 40 से लेकर 105 फीट तक ऊंचे रावण के पुतले बनाए गए, जिनका दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जैसे ही रावण के पुतलों में आग लगाई गई, पूरा आसमान आतिशबाजी की रोशनी से जगमगा उठा। जय श्रीराम के जयकारों के बीच लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया।

दशहरे के अवसर पर शहर में सुबह से ही उत्सव का माहौल देखने को मिला। शाम होते ही रावण दहन स्थलों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने मेले, आतिशबाजी और अन्य कार्यक्रमों का आनंद लिया। कई स्थानों पर रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का भी दहन किया गया।

25 से अधिक स्थानों पर हुआ रावण दहन

शहर में दशहरे के आयोजन को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष तैयारियां की गई थीं। 25 से अधिक स्थानों पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किए गए। आयोजकों ने दर्शकों की सुविधा और कार्यक्रम को आकर्षक बनाने के लिए व्यवस्थाएं कीं।

40 फीट से लेकर 105 फीट तक के पुतलों ने लोगों का ध्यान खींचा। बड़े पुतलों को देखने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह नजर आया। रावण दहन से पहले कई जगह धार्मिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं।

शाम के समय जैसे ही पुतलों का दहन शुरू हुआ, लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। आतिशबाजी के बीच रावण के पुतलों को जलते देख दर्शकों ने उत्सव का आनंद लिया।

आतिशबाजी से जगमगाया आसमान

रावण दहन के साथ हुई आतिशबाजी दशहरा समारोह का प्रमुख आकर्षण रही। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई दी और आसपास मौजूद लोगों ने इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया। कई स्थानों पर मेले और खाने-पीने की दुकानों के कारण भी रौनक बनी रही।

दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा अवसर भी है। इस दिन लोग परिवार और मित्रों के साथ आयोजन स्थलों पर पहुंचकर त्योहार मनाते हैं।

बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश

दशहरा पर्व भगवान श्रीराम की ओर से रावण के वध और बुराई पर अच्छाई की जीत की याद दिलाता है। रावण दहन के माध्यम से अहंकार, अन्याय और नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने का संदेश दिया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। इसी परंपरा के तहत हर साल विजयादशमी पर रावण के पुतले जलाए जाते हैं। यह आयोजन लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।

उत्साह के साथ मनाया गया दशहरा

शहर में 25 से अधिक स्थानों पर हुए रावण दहन कार्यक्रमों ने दशहरे की रौनक बढ़ा दी। ऊंचे पुतलों, आतिशबाजी और जयकारों के बीच लोगों ने त्योहार मनाया। आयोजन स्थलों पर उमड़ी भीड़ ने पर्व के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह को दर्शाया।

रावण के पुतलों के दहन के साथ ही लोगों ने बुराइयों को छोड़कर अच्छे विचारों और सकारात्मक जीवन की राह अपनाने का संदेश दिया। इस तरह शहर में दशहरा उत्सव धार्मिक आस्था, परंपरा और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।