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NHAI टोल प्लाजा फर्जीवाड़े में ED की बड़ी कार्रवाई, 14 राज्यों में एक साथ छापेमारी; फर्जी रसीदों से रकम डायवर्ट करने का आरोप

 

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से जुड़े टोल प्लाजा पर कथित फर्जीवाड़े के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने देश के 14 राज्यों में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की है। आरोप है कि टोल वसूली की रकम को फर्जी रसीदों और संदिग्ध लेनदेन के जरिए डायवर्ट किया गया। इस कार्रवाई के बाद टोल प्लाजा से जुड़े ठेकेदारों, ऑपरेटरों और अन्य संबंधित लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक, ED की कार्रवाई उन लोगों और संस्थानों से जुड़े परिसरों पर की जा रही है, जिन पर टोल कलेक्शन में अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी में शामिल होने का संदेह है। जांच एजेंसी को कथित तौर पर ऐसे लेनदेन और दस्तावेज मिले हैं, जिनसे टोल के जरिए वसूली गई रकम को निर्धारित खाते तक पहुंचने से पहले ही दूसरी जगह ट्रांसफर किए जाने की आशंका है।

जांच का एक अहम पहलू कथित फर्जी रसीदों से जुड़ा है। आरोप है कि टोल प्लाजा पर वास्तविक वाहनों से वसूली गई रकम और रिकॉर्ड में दर्ज राशि के बीच अंतर पैदा करने के लिए फर्जी रसीदों का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए टोल की रकम को अलग-अलग माध्यमों से डायवर्ट करने का प्रयास किया गया। हालांकि, फर्जी रसीदों के जरिए कितनी रकम का कथित तौर पर गबन या डायवर्जन हुआ, इसका अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

ED की टीमों ने एक साथ 14 राज्यों में कार्रवाई शुरू की है। छापेमारी के दौरान संबंधित परिसरों से दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि टोल प्लाजा से जुड़े वित्तीय लेनदेन में किन कंपनियों या व्यक्तियों के खातों का इस्तेमाल किया गया। फर्जी रसीदें किस स्तर पर तैयार की जाती थीं, टोल कलेक्शन के वास्तविक आंकड़ों में कथित तौर पर किस तरह बदलाव किया जाता था और डायवर्ट की गई रकम आखिर कहां पहुंचती थी, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

NHAI देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे में टोल वसूली में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता का मामला गंभीर माना जाता है। टोल प्लाजा पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहनों से शुल्क वसूला जाता है। इसलिए रिकॉर्ड और वास्तविक कलेक्शन के बीच कथित हेराफेरी से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

फिलहाल ED की छापेमारी और जांच जारी है। एजेंसी की ओर से बरामद दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच के बाद कथित फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में शामिल लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।