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उज्जैन के ताजपुर में ड्रैगन फ्रूट की खेती, किसान रोजाना मंडियों में बेचकर कमा रहे लाखों

 

उज्जैन जिले के ताजपुर क्षेत्र में अब विदेशी फल ड्रैगन फ्रूट की खेती भी होने लगी है। मैक्सिको के साथ मध्य और दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का मूल फल माना जाने वाला ड्रैगन फ्रूट अब स्थानीय किसानों के लिए कमाई का जरिया बन रहा है।

ताजपुर के किसान विष्णु पाटीदार ने रायपुर में ड्रैगन फ्रूट की खेती देखी थी। वहां इसकी खेती का तरीका और बाजार में इसकी मांग को देखते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र में भी इसकी खेती शुरू करने का निर्णय लिया। शुरुआत के बाद उन्हें उत्पादन और बाजार से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा।

विष्णु पाटीदार अब अपने खेत में तैयार ड्रैगन फ्रूट को इंदौर सहित आसपास की मंडियों में बेच रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे रोजाना मंडियों में फल की बिक्री कर लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। इससे क्षेत्र के अन्य किसानों का ध्यान भी ड्रैगन फ्रूट जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर आकर्षित हो रहा है।ड्रैगन फ्रूट की खेती पारंपरिक फसलों से अलग है। इसकी बाजार में मांग और बेहतर कीमत मिलने की संभावना के कारण कई किसान अब इसकी खेती को आय के नए विकल्प के रूप में देख रहे हैं। हालांकि खेती शुरू करने से पहले जलवायु, मिट्टी, सिंचाई और बाजार की उपलब्धता जैसी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

ताजपुर में ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रयोग यह दिखाता है कि किसान पारंपरिक फसलों के साथ नई और बाजार आधारित फसलों की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। रायपुर में खेती देखने के बाद शुरू किया गया विष्णु पाटीदार का यह प्रयास अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।इंदौर और आसपास की मंडियों में नियमित बिक्री से उन्हें बाजार से जोड़ने में मदद मिल रही है। ड्रैगन फ्रूट की खेती से होने वाली कमाई और बाजार की मांग को देखते हुए आने वाले समय में क्षेत्र के अन्य किसान भी इस फसल को अपनाने में रुचि दिखा सकते हैं।