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महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दौरान खुले कपाट, वीरभद्रजी के कान में हुआ स्वस्ति वाचन

 

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई। निर्धारित समय पर भगवान महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार भस्म आरती से पहले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

मंदिर की परंपरा के अनुसार सबसे पहले सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद मंदिर में घंटी बजाकर भगवान महाकाल से आज्ञा ली गई। भगवान की आज्ञा के बाद सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए। इसके साथ ही बाबा महाकाल के दर्शन और पूजा की प्रक्रिया शुरू हुई।

मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन

चांदी के पट खुलने के बाद पुजारी और पुरोहितों ने भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन किया। मंदिर में मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बाबा महाकाल का अभिषेक किया गया। भस्म आरती के दौरान भगवान को भस्म अर्पित की गई।

भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस आरती में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। सुबह तड़के होने वाली आरती के दौरान मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयकारे गूंजते रहे।

महाकाल के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु

शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। भस्म आरती के दौरान भक्तों ने भगवान महाकाल की आराधना की और सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए कर्मचारियों की तैनाती रही।

महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उज्जैन में भगवान महाकाल को नगर का अधिपति माना जाता है। यही वजह है कि देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के पूजन की प्रत्येक प्रक्रिया मंदिर की निर्धारित परंपराओं के अनुसार संपन्न होती है। वीरभद्रजी के कान में स्वस्ति वाचन और भगवान से आज्ञा लेने के बाद चांदी के पट खोलना इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।

भक्तों ने भस्म आरती के दिव्य दर्शन कर भगवान महाकाल से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही आध्यात्मिक और भक्तिमय माहौल नजर आया।