कोविड में सेवा देने वाले डॉक्टरों ने जलाईं डिग्रियां, खाली पदों पर संविदा नियुक्ति की मांग; बोले- नौकरी नहीं तो इनका क्या करें?
कोरोना महामारी के दौरान मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टरों ने नौकरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने अपनी डिग्रियां जलाकर नाराजगी जताई और सरकार से स्वास्थ्य विभाग के खाली पदों पर संविदा नियुक्ति देने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि कोविड के कठिन दौर में उन्होंने अपनी सेवाएं दीं, लेकिन अब रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
डॉक्टरों ने सवाल उठाया कि जब पढ़ाई पूरी करने और मरीजों की सेवा करने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही, तो इन डिग्रियों का क्या फायदा? उनका कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों पर योग्य डॉक्टरों को नियुक्त करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
कोविड के दौरान दी थीं सेवाएं
कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव था। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई थी। इस दौरान कई डॉक्टरों ने कोविड से जुड़े कामों में सेवाएं दीं।
अब प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि महामारी के दौरान काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी रोजगार या संविदा नियुक्ति का अवसर नहीं मिल रहा है। इसी समस्या को लेकर उन्होंने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन किया।
खाली पदों पर संविदा नियुक्ति की मांग
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की प्रमुख मांग है कि स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों पर योग्य डॉक्टरों को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाए। उनका तर्क है कि इससे एक ओर रोजगार की समस्या कम हो सकती है, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
डॉक्टरों के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन की जरूरत को देखते हुए रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि कोविड के दौरान सेवा देने वाले डॉक्टरों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
डिग्रियां जलाकर जताई नाराजगी
नौकरी की मांग को लेकर डॉक्टरों ने विरोध के दौरान अपनी डिग्रियां जलाईं। यह कदम उन्होंने रोजगार नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर करने के लिए उठाया। डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल शिक्षा हासिल करने में वर्षों की मेहनत और संसाधन लगते हैं, लेकिन नौकरी के अवसर नहीं मिलने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
उनके इस विरोध ने डॉक्टरों की भर्ती, संविदा नियुक्तियों और स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों को भरने जैसे मुद्दों पर ध्यान खींचा है।
सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
अब डॉक्टरों की मांगों पर सरकार और संबंधित स्वास्थ्य विभाग के रुख पर नजर रहेगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रदर्शन का स्थान, डॉक्टरों की संख्या, खाली पदों का आंकड़ा और सरकार की ओर से जारी प्रतिक्रिया का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
फिलहाल प्रदर्शनकारी डॉक्टर खाली पदों पर संविदा नियुक्ति और रोजगार के अवसर देने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाता है, यह संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और भर्ती प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।