धीरेंद्र शास्त्री बोले- देश में जातिवाद नहीं, राष्ट्रवाद चाहिए: हिंदू-सनातन एकता रथयात्रा के दूसरे दिन 7 वचनों की शपथ, बुलडोजर से बरसाए फूल
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू-सनातन एकता रथयात्रा के दूसरे दिन देश में जातिवाद के बजाय राष्ट्रवाद को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को जातियों में बंटने के बजाय एकजुट होकर राष्ट्रहित और सनातन संस्कृति के लिए काम करना चाहिए। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर रथयात्रा का स्वागत किया गया और बुलडोजर से फूल बरसाए गए।
जातिवाद छोड़कर एकता का संदेश
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि देश में जातिवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की भावना मजबूत होनी चाहिए। उनके अनुसार, समाज की एकजुटता से ही देश और संस्कृति को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने हिंदू समाज से आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
रथयात्रा का उद्देश्य हिंदू समाज में एकता और सनातन परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया गया। यात्रा के दौरान लोगों से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की अपील भी की गई।
दूसरे दिन सात वचनों की शपथ
हिंदू-सनातन एकता रथयात्रा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को सात वचनों की शपथ दिलाई गई। इसका मकसद लोगों को सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और सनातन परंपराओं के संरक्षण से जुड़े संकल्प लिए।
हालांकि, सातों वचनों के सटीक शब्दों और उनके विस्तृत विवरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हो सकी है। इसलिए इनके बारे में आधिकारिक कार्यक्रम विवरण सामने आने पर ही स्पष्ट जानकारी दी जा सकती है।
बुलडोजर से बरसाए गए फूल
रथयात्रा के रास्ते में कई जगह श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। यात्रा के दौरान बुलडोजर से फूल बरसाए जाने का दृश्य भी आकर्षण का केंद्र रहा। स्वागत के दौरान लोगों ने धार्मिक उत्साह के साथ भागीदारी की। कई स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से यात्रा का माहौल उत्सव जैसा दिखाई दिया।
रथयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। आयोजन से जुड़े लोगों का उद्देश्य सनातन परंपराओं के प्रति लोगों की आस्था को मजबूत करना और समाज को एक मंच पर लाना बताया गया।
सामाजिक एकता पर दिया जोर
धीरेंद्र शास्त्री अपने धार्मिक कार्यक्रमों और प्रवचनों के माध्यम से हिंदू समाज की एकता का मुद्दा उठाते रहे हैं। इस यात्रा में भी उन्होंने जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की बात कही।
उनके संदेश के केंद्र में सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषय रहे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भागीदारी और स्वागत कार्यक्रमों ने आयोजन को प्रमुखता दी।
हिंदू-सनातन एकता रथयात्रा के दूसरे दिन का मुख्य संदेश यही रहा कि समाज को आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर एकता की दिशा में प्रयास करना चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से जातिवाद के बजाय राष्ट्रवाद की भावना अपनाने और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने की अपील की।