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धार प्रशासन ने जुमे की नमाज के लिए तय किया नया स्थल, वीडियो में देंखे मुस्लिम समाज ने किया विरोध; सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

 

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद जिला प्रशासन ने जुमे की नमाज के लिए नया स्थान निर्धारित कर दिया है। प्रशासन ने भोजशाला परिसर की बजाय मालीवाड़ा स्थित चालीस पीर परिसर, जो विवादित स्थल से करीब 2 किलोमीटर दूर है, को नमाज के लिए चिन्हित किया है। यहां प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, प्रशासन के इस फैसले का मुस्लिम समाज ने विरोध किया है। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत बताते हुए नई व्यवस्था को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है।

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हर शुक्रवार चालीस पीर परिसर में नमाज की व्यवस्था

जिला प्रशासन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों के पालन में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है। इसके तहत हर शुक्रवार निर्धारित समय में चालीस पीर परिसर में नमाज अदा की जा सकेगी।प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय सभी पक्षों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

मुस्लिम समाज ने जताई आपत्ति

मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने प्रशासन के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि जिस स्थल को लेकर विवाद चल रहा है, उससे करीब 2 किलोमीटर दूर नमाज की व्यवस्था करना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत।उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज चालीस पीर परिसर में नमाज अदा नहीं करेगा और प्रशासन के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उनके अनुसार, यह व्यवस्था अदालत के अंतरिम आदेश की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में दी जाएगी चुनौती

मुस्लिम समाज ने स्पष्ट किया है कि वह कानूनी रास्ता अपनाएगा और प्रशासन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। उनका कहना है कि इस मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय से ही लिया जाएगा।

क्या है भोजशाला विवाद?

धार की भोजशाला लंबे समय से विवाद का विषय रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद का हिस्सा बताता है। इसी विवाद को लेकर मामला वर्षों से विभिन्न अदालतों में विचाराधीन है।सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है, लेकिन मुस्लिम समाज की असहमति के कारण यह मामला एक बार फिर कानूनी और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।फिलहाल प्रशासन ने शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है, जबकि मुस्लिम समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नए स्थल पर नमाज अदा नहीं करेगा और अपने अधिकारों के लिए सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।