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इंदरगढ़ के एससी बालक छात्रावास की बदहाल व्यवस्था, छात्र किराए के कमरों में रहने को मजबूर; हॉस्टल के पलंग पर बंधा मिला अधीक्षक का कुत्ता

 

मध्य प्रदेश के इंदरगढ़ स्थित एससी बालक छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रावास में रहने वाले छात्र जहां किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं, वहीं हॉस्टल के पलंग पर अधीक्षक का कुत्ता बंधा मिला। इस मामले के सामने आने के बाद छात्रावास प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, छात्रावास में रहने के लिए निर्धारित व्यवस्था होने के बावजूद कई छात्र बाहर किराए के कमरों में रह रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि उन्हें छात्रावास की सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि भवन और संसाधन मौजूद हैं। मजबूरी में उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए किराए पर कमरा लेना पड़ रहा है।

मामला तब और चर्चा में आया जब छात्रावास के निरीक्षण के दौरान एक पलंग पर अधीक्षक का कुत्ता बंधा हुआ मिला। छात्रावास में जहां विद्यार्थियों के रहने और पढ़ाई की व्यवस्था होनी चाहिए, वहां इस तरह की स्थिति देखकर लोगों ने नाराजगी जताई है।

स्थानीय लोगों और छात्रों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों के लिए मिलने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए। यदि छात्र बाहर रहने को मजबूर हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

छात्रावासों का उद्देश्य दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित आवास और बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराना होता है। लेकिन इंदरगढ़ के इस छात्रावास की स्थिति ने सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित विभाग से जांच की मांग की जा रही है। अधिकारियों द्वारा छात्रावास की व्यवस्थाओं, छात्रों की उपस्थिति, आवंटित सुविधाओं और अधीक्षक की भूमिका की जांच की जा सकती है।

वहीं, छात्रों और अभिभावकों ने मांग की है कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को उनकी पात्रता के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई हो।

फिलहाल इस मामले में विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि छात्र किराए पर क्यों रह रहे थे और छात्रावास की व्यवस्थाओं में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। इस घटना ने आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रावासों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।