दतिया उपचुनाव: नामांकन से पहले मान-मनौव्वल का दौर, रूठे नेताओं को मनाने में जुटीं भाजपा-कांग्रेस; कांग्रेस के नायक मंच से रहे दूर
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में नामांकन प्रक्रिया से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उम्मीदवारों के नामांकन से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने रूठे नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने में जुटे रहे, ताकि चुनावी एकजुटता का संदेश दिया जा सके।
हालांकि, कांग्रेस के प्रयासों के बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. अवधेश नायक (या संबंधित नायक नेता) कार्यक्रम के दौरान मंच पर नजर नहीं आए, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी की चर्चाओं को और बल मिला।
दोनों दलों में चला मान-मनौव्वल
उपचुनाव को प्रतिष्ठा का मुकाबला मानते हुए भाजपा और कांग्रेस ने संगठनात्मक एकजुटता पर जोर दिया। दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं ने नाराज पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उन्हें साथ लाने की कोशिश की।
पार्टी नेताओं का मानना है कि उपचुनाव में जीत के लिए संगठन की एकजुटता सबसे अहम होगी।
कांग्रेस में नाराजगी की चर्चा
कांग्रेस के कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता नायक के मंच पर मौजूद नहीं रहने से राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, पार्टी की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के समय इस तरह की नाराजगी पार्टी की रणनीति पर असर डाल सकती है, इसलिए कांग्रेस नेतृत्व इसे जल्द सुलझाने की कोशिश में जुटा है।
भाजपा भी साध रही संगठन
भाजपा ने भी नामांकन से पहले संगठन के भीतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से चुनाव में पूरी ताकत से जुटने की अपील करते हुए किसी भी प्रकार के मतभेद भुलाकर एकजुट होकर काम करने का संदेश दिया।
नामांकन के साथ तेज होगा प्रचार
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद दतिया उपचुनाव का चुनावी माहौल और गर्म होने की संभावना है। दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है और आने वाले दिनों में वरिष्ठ नेताओं की सभाएं, रोड शो और जनसंपर्क अभियान भी तेज होंगे।
दतिया उपचुनाव को प्रदेश की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में दोनों दल न केवल चुनावी जीत, बल्कि संगठनात्मक मजबूती का भी प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे हैं।