इंदौर के सरकारी अस्पतालों के पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया, मरीजों की सेहत पर मंडराया खतरा
मध्य प्रदेश के इंदौर में पानी की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के लिए लगाए गए आरओ और कूलरों के पीने के पानी में ऐसे कीटाणु पाए गए हैं, जो मानव और जानवरों के मल में मौजूद होते हैं। जांच में मिले ये बैक्टीरिया वही बताए जा रहे हैं, जो भागीरथपुरा में पानी की जांच के दौरान सामने आए थे।
अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन रोजाना पहुंचते हैं। ऐसे में पीने के पानी में दूषित तत्वों की मौजूदगी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
आरओ और कूलर के पानी के लिए गए सैंपल
जानकारी के अनुसार सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के लिए लगाए गए आरओ और कूलरों से पानी के नमूने लिए गए थे। जांच के बाद इन नमूनों में ऐसे कीटाणु पाए गए, जो आमतौर पर मानव और पशुओं के मल में मौजूद होते हैं।
इन बैक्टीरिया की मौजूदगी पानी के दूषित होने का संकेत मानी जाती है। खासकर अस्पताल जैसे स्थान पर ऐसी स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि यहां पहले से बीमार और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं।
भागीरथपुरा में भी मिले थे यही कीटाणु
पानी में पाए गए कीटाणुओं को लेकर एक और गंभीर पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि इसी तरह के बैक्टीरिया भागीरथपुरा इलाके में पानी की जांच के दौरान भी मिले थे।
भागीरथपुरा में दूषित पानी को लेकर पहले भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता सामने आ चुकी है। अब सरकारी अस्पतालों में लगाए गए पीने के पानी के स्रोतों में भी उसी तरह के कीटाणु मिलने से पानी की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
मरीजों और परिजनों के स्वास्थ्य को खतरा
अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए स्वच्छ पेयजल बेहद जरूरी है। दूषित पानी पीने से पेट संबंधी संक्रमण, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए दूषित पानी ज्यादा जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन के सामने आरओ, कूलर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई और जांच सुनिश्चित करने की चुनौती है।
पानी की व्यवस्था की निगरानी जरूरी
अस्पतालों में लगाए गए आरओ और कूलरों की समय-समय पर सफाई, फिल्टर बदलने और पानी की गुणवत्ता की जांच करना जरूरी है। केवल आरओ मशीन लगा देने से पानी सुरक्षित नहीं हो जाता। यदि फिल्टर लंबे समय से नहीं बदले गए हों या पानी की टंकी और पाइपलाइन में गंदगी हो तो दूषित पानी की समस्या पैदा हो सकती है।
अब जरूरत है कि संबंधित अस्पतालों में पानी की पूरी सप्लाई व्यवस्था की जांच कराई जाए। साथ ही दूषित पाए गए पानी के स्रोतों को तत्काल ठीक किया जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित पेयजल मिल सके।
इंदौर के सरकारी अस्पतालों में पानी में मल से जुड़े बैक्टीरिया मिलने की खबर ने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों के लिए लगाए गए पानी के स्रोतों की नियमित जांच और स्वच्छता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।