×

ग्वालियर में साइबर ठगों का जाल: 8 महीने में 4089 लोगों से 31 करोड़ की ठगी, IAS के नाम पर रिटायर्ड इंजीनियर से ऐंठे 1.56 लाख

 

ग्वालियर में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। ताजा मामले में ठगों ने आईएएस अधिकारी पी. नरहरि के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाई और सिंचाई विभाग के रिटायर्ड कार्यपालन यंत्री मैथिली शरण गुप्ता को अपने जाल में फंसा लिया। ठगों ने उनसे 1.56 लाख रुपए की ठगी कर ली।

जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने आईएएस अधिकारी के नाम और पहचान का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया पर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद रिटायर्ड अधिकारी से संपर्क किया गया। ठगों ने अपनी पहचान इस तरह पेश की कि पीड़ित को भरोसा हो गया। इसके बाद अलग-अलग बहानों से उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लिए गए।

जब मैथिली शरण गुप्ता को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की। साइबर पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है।

आंकड़ों के मुताबिक ग्वालियर जिले में साइबर ठगी का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। पिछले आठ महीनों में साइबर ठग 4089 लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। इन मामलों में करीब 31 करोड़ रुपए की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में साइबर अपराध सामने आने से पुलिस के सामने भी चुनौती बढ़ गई है।

साइबर ठग कभी अधिकारी या पुलिसकर्मी बनकर तो कभी रिश्तेदार और परिचित बनकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर भरोसा हासिल करना भी ठगी का एक नया तरीका बन गया है। इसके बाद पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर कराए जाते हैं।

पुलिस लगातार लोगों को सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करने और किसी भी व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर नहीं करने की सलाह दे रही है। साथ ही अधिकारियों के नाम से आने वाले संदिग्ध मैसेज और कॉल की पहचान करने के लिए भी लोगों को सतर्क रहने को कहा जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी होने पर पीड़ित को तुरंत शिकायत करनी चाहिए, ताकि रकम को फ्रीज कराने और आरोपियों तक पहुंचने की संभावना बढ़ सके।