डकैतों के लिए बदनाम ग्वालियर-चंबल में साइबर ठगी का नेटवर्क, फर्जी सिम से 12 राज्यों में 180 लोगों को बनाया शिकार
कभी डकैतों के आतंक के लिए देशभर में चर्चा में रहने वाला ग्वालियर-चंबल अंचल अब साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क को लेकर सुर्खियों में है। ग्वालियर में अलग-अलग वेंडरों से जारी कराई गई फर्जी सिम का इस्तेमाल कर देश के 12 राज्यों में लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों ने करीब 180 लोगों को अपना निशाना बनाया और उनसे 14 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठग ली।
मामले का खुलासा साइबर पुलिस की जांच के दौरान हुआ। जांच में पता चला कि ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए कई मोबाइल नंबर ग्वालियर के अलग-अलग सिम वेंडरों के जरिए जारी किए गए थे। आरोप है कि इन सिम को नियमों को ताक पर रखकर फर्जी या गलत दस्तावेजों के आधार पर एक्टिव कराया गया। इसके बाद इन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे साइबर ठगों ने लोगों को जाल में फंसाने के लिए किया।
साइबर ठगों ने अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने निशाने पर लिया। किसी को निवेश के नाम पर ज्यादा मुनाफे का लालच दिया गया तो किसी को नौकरी, डिजिटल गिरफ्तारी, बैंक खाते या ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े बहाने बनाकर ठगा गया। ठगों ने मोबाइल नंबरों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए पीड़ितों से संपर्क किया और धीरे-धीरे उन्हें अपने जाल में फंसाया।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ठगी की घटनाएं अलग-अलग राज्यों में हुईं, जबकि उनके पीछे इस्तेमाल होने वाली सिम का कनेक्शन ग्वालियर से सामने आया। अलग-अलग मामलों के मोबाइल नंबरों और लेनदेन की जानकारी को जोड़ने पर एक बड़े नेटवर्क की तस्वीर सामने आने लगी।
जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में 12 राज्यों के करीब 180 लोग ठगी का शिकार हुए हैं। पीड़ितों से ठगी गई रकम 14 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इतनी बड़ी रकम की ठगी सामने आने के बाद पुलिस ने सिम जारी करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े वेंडरों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।
फर्जी सिम का इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसे मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। फर्जी दस्तावेजों से जारी सिम के कारण जांच एजेंसियों को अपराधियों तक पहुंचने में मुश्किल होती है। यही वजह है कि पुलिस अब सिम जारी करने वाले वेंडरों और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी ध्यान दे रही है।
ग्वालियर-चंबल की पहचान लंबे समय तक बीहड़ों और डकैतों से जुड़ी रही है। समय के साथ क्षेत्र में अपराध का स्वरूप बदला है और अब साइबर अपराध का यह नेटवर्क नई चुनौती बनकर सामने आया है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठग भी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।
इस मामले ने मोबाइल सिम जारी करने की प्रक्रिया में लापरवाही और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और ठगी की रकम के लेनदेन की जानकारी जुटाने में लगी है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना है।