कुत्तों की नसबंदी टेंडर पर विवाद, बजट ढाई गुना बढ़ा लेकिन काम आधा होने पर उठे सवाल
नगर प्रशासन से जुड़ी एक नई रिपोर्ट में आवारा कुत्तों की नसबंदी (स्टेरलाइजेशन) के टेंडर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार इस टेंडर का बजट पहले की तुलना में करीब ढाई गुना बढ़ा दिया गया है, जबकि लक्ष्य और काम का दायरा आधा कर दिया गया है। इस असमानता को लेकर अब पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण के लिए नसबंदी कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जाता है, तो फिर बजट बढ़ाने के बावजूद काम का लक्ष्य क्यों घटाया गया। नागरिकों और पशु कल्याण से जुड़े संगठनों ने इस निर्णय पर संदेह जताया है।
सूत्रों के अनुसार, पहले इस योजना के तहत अधिक संख्या में कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन नए टेंडर में संख्या घटा दी गई है। इसके साथ ही खर्च में उल्लेखनीय बढ़ोतरी ने पूरे मामले को और विवादास्पद बना दिया है।
Rajasthan सहित कई जगहों पर आवारा पशुओं की समस्या लंबे समय से एक बड़ी शहरी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में नसबंदी कार्यक्रमों को प्रभावी समाधान माना जाता है, लेकिन इस तरह के वित्तीय और प्रबंधन संबंधी सवालों ने योजना की प्रभावशीलता पर संदेह पैदा कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक योजना में बजट और आउटपुट के बीच संतुलन होना जरूरी है, ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके। लेकिन इस मामले में बढ़े हुए खर्च और घटे हुए लक्ष्य को लेकर जवाबदेही तय करना जरूरी माना जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला चर्चा में आने के बाद आगे इसकी जांच या समीक्षा की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।