वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस अक्टूबर में तेज करेगी आंदोलन, ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत प्रदेश से ब्लॉक स्तर तक होंगे कार्यक्रम
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अक्टूबर में अपना आंदोलन तेज करने की तैयारी में है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने दो महीने तक चलने वाले ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर की पार्टी इकाइयों के लिए कार्यक्रम तय किए हैं। इस अभियान के जरिए कांग्रेस मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाने और पार्टी कार्यकर्ताओं को आंदोलन से जोड़ने की योजना बना रही है।
प्रदेश से ब्लॉक स्तर तक चलेंगे कार्यक्रम
कांग्रेस की ओर से तय कार्यक्रमों के तहत अभियान को संगठन के विभिन्न स्तरों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। प्रदेश इकाइयों के साथ जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी भी इसमें भाग लेंगे। पार्टी का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को जनता के बीच उठाना और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अपनी मांगें सामने रखना है।
अभियान के दौरान स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। इनके जरिए कार्यकर्ताओं और आम लोगों को मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों के बारे में जानकारी देने पर जोर रहेगा।
‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर कांग्रेस की मुहिम
कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठा रही है। पार्टी इन मुद्दों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और मताधिकार से जोड़कर देखती है। ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के जरिए कांग्रेस इन सवालों पर अपनी राजनीतिक मुहिम को आगे बढ़ाना चाहती है।
हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी और ‘वोट चोरी’ से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही की जा सकती है। कांग्रेस के आरोपों और निर्वाचन अधिकारियों के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी होगा।
दो महीने के अभियान में संगठन की भूमिका अहम
AICC की ओर से कार्यक्रम तय किए जाने के बाद प्रदेश, जिला और ब्लॉक इकाइयों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय संगठन अभियान से जुड़े कार्यक्रमों को लागू करेंगे और मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों को सामने लाने का प्रयास करेंगे।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में कार्यक्रमों की तारीखों, स्थानों और प्रत्येक स्तर पर होने वाली गतिविधियों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। ऐसे में अभियान का पूरा कार्यक्रम सामने आने के बाद इसकी रूपरेखा और आगे की गतिविधियों की तस्वीर स्पष्ट होगी।
अक्टूबर में आंदोलन तेज करने की कांग्रेस की तैयारी से मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में बना रहने की संभावना है।