राजगढ़ में खराब सोयाबीन के सर्वे और मुआवजे की मांग, कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट पर दिया धरना
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में खराब हुई सोयाबीन की फसल को लेकर किसानों की समस्याएं अब राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही हैं। फसल नुकसान का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए किसानों की परेशानी दूर करने की अपील की।
कांग्रेस का कहना है कि जिले के कई क्षेत्रों में बारिश और मौसम की मार के कारण सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है और अब उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को तत्काल सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को राहत राशि उपलब्ध करानी चाहिए।
फसल नुकसान से परेशान किसान
राजगढ़ जिले में सोयाबीन प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है। बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती पर निर्भर रहते हैं। मौसम की अनिश्चितता के कारण कई इलाकों में फसल खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
किसानों का कहना है कि फसल में नुकसान होने के बाद भी अभी तक नुकसान का सही आकलन नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि अगर समय पर सर्वे नहीं हुआ तो कई प्रभावित किसान सरकारी सहायता से वंचित रह सकते हैं।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर जताया विरोध
किसानों की मांगों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और किसानों के हित में जल्द निर्णय लेने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खराब फसल के कारण किसान पहले ही आर्थिक दबाव में हैं, ऐसे में उन्हें राहत देने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए।
सर्वे और मुआवजे की मांग
धरना प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें खराब सोयाबीन फसल का तत्काल सर्वे, नुकसान का सही आकलन और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग प्रमुख रही।
कांग्रेस का कहना है कि फसल नुकसान का सर्वे पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि वास्तविक किसानों तक सरकारी सहायता पहुंच सके। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
फिलहाल कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर बनी हुई है। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने अब किसानों की शिकायतों की जांच और नुकसान के आकलन की चुनौती है।
मौसम की मार झेल रहे किसानों को राहत देने के लिए फसल सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई से यह साफ होगा कि प्रभावित किसानों को कितनी राहत मिल पाती है।
राजगढ़ में सोयाबीन फसल को लेकर शुरू हुआ यह मुद्दा अब किसानों की आर्थिक स्थिति और सरकारी राहत व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। किसान संगठनों और राजनीतिक दलों की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।