आईसीयू में बदल रहा मरीजों का ट्रेंड: युवाओं में बढ़ रहे स्ट्रेस और स्क्रीन टाइम से जुड़े मामले, विशेषज्ञ बोले- गंभीर मरीजों का पैटर्न बदला
अस्पतालों की इंटेंसिव केयर यूनिट यानी आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां आईसीयू में गंभीर संक्रमण, हृदय संबंधी बीमारियों, बुजुर्गों और लंबे समय से चली आ रही बीमारियों वाले मरीजों की संख्या अधिक दिखाई देती थी, वहीं अब अपेक्षाकृत कम उम्र के मरीज भी गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं में बढ़ता मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों में कमी जैसे कारक स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि पिछले कुछ समय में लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है। लगातार काम का दबाव, पढ़ाई और करियर की चिंता, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल और पर्याप्त नींद नहीं लेना युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
स्क्रीन टाइम और बिगड़ी दिनचर्या चिंता का विषय
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल सीधे तौर पर हर गंभीर बीमारी का कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन अत्यधिक स्क्रीन टाइम अक्सर कम शारीरिक गतिविधि, देर रात तक जागने और खराब नींद जैसी आदतों से जुड़ा होता है। लगातार बैठकर काम करने और व्यायाम की कमी से वजन बढ़ने, मेटाबॉलिक समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका बढ़ सकती है।
युवाओं में तनाव भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनकर सामने आ रहा है। लगातार तनाव का असर नींद, खानपान और रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ सकता है। कुछ मामलों में लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करते रहते हैं और स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल पहुंचते हैं।
गंभीर मरीजों का पैटर्न बदलने की चर्चा
आईसीयू विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर मरीजों की उम्र और उनकी स्वास्थ्य संबंधी पृष्ठभूमि को लेकर पहले जैसा पैटर्न हर जगह देखने को नहीं मिल रहा है। अब कम उम्र के मरीजों में भी कई तरह की जटिल स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि किसी अस्पताल या क्षेत्र में मरीजों के पैटर्न में बदलाव के कई कारण हो सकते हैं और इसे केवल स्क्रीन टाइम या तनाव से जोड़ना सही नहीं होगा।
डॉक्टर लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, पर्याप्त नींद, संतुलित खानपान और रोजाना शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। साथ ही लगातार बने रहने वाले शारीरिक या मानसिक लक्षणों को नजरअंदाज न करने की बात कही जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली के बीच लोगों को अपनी सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। खासतौर पर युवाओं में काम और डिजिटल गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है। समय रहते स्वास्थ्य संबंधी समस्या की पहचान और उपचार से कई गंभीर स्थितियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।