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बिल्डर संदीप नागर की मौत की जांच तेज, मोबाइल और कारोबारी संपर्कों से खुलेगा राज

 

इंदौर के बिल्डर संदीप उर्फ बंटी नागर की मौत के मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब जांच का फोकस उनके करीबियों, कारोबारी साझेदारों, फाइनेंसरों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े लोगों पर है। पुलिस ने संदीप नागर का मोबाइल जब्त कर लिया है और उसमें मौजूद कॉल डिटेल, बातचीत तथा अन्य डिजिटल जानकारी की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत से पहले वह किन लोगों के संपर्क में थे और क्या किसी व्यक्ति या कारोबारी विवाद को लेकर उन पर दबाव था।

संदीप नागर ने इंदौर के पलासिया क्षेत्र स्थित अपने ऑफिस में फांसी लगाकर जान दी थी। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में आत्महत्या के पीछे कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। पुलिस को अब तक कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। ऐसे में जांच अधिकारियों के लिए उनके मोबाइल और ऑफिस से मिले दस्तावेज महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक, मोबाइल में लॉक लगा हुआ है, जिसके कारण उसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आ सकी है। पुलिस तकनीकी माध्यमों से मोबाइल का डेटा हासिल करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद कॉल डिटेल और बातचीत के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि घटना से पहले संदीप किन लोगों के लगातार संपर्क में थे। पुलिस पिछले करीब एक महीने के संपर्कों और बातचीत पर विशेष नजर रख रही है।

जांच का एक बड़ा हिस्सा संदीप नागर के कारोबारी रिश्तों से जुड़ा है। पुलिस उनके कर्मचारियों, पार्टनरों और कारोबारियों से पूछताछ कर रही है। ताजा जांच में कुछ कारोबारियों और फाइनेंसरों के नाम सामने आने की बात कही गई है। पुलिस दस्तावेजों और कारोबारी लेन-देन के रिकॉर्ड के जरिए यह समझने का प्रयास कर रही है कि उनके कारोबार में किन लोगों का पैसा लगा था और किन लोगों से उनका आर्थिक लेन-देन चल रहा था।

पुलिस को ऑफिस से मिले दस्तावेजों और डायरियों में कई लोगों से करोड़ों रुपये के लेन-देन का उल्लेख मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ संपत्ति सौदों और प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है। मौत से कुछ दिन पहले हुए संपत्ति संबंधी लेन-देन को भी जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि, पुलिस ने अभी किसी एक वजह को संदीप नागर की मौत का कारण नहीं माना है।

पुलिस फिलहाल पारिवारिक विवाद, कारोबारी प्रतिस्पर्धा, आर्थिक दबाव और ब्लैकमेलिंग समेत कई पहलुओं पर जांच कर रही है। साथ ही ऑफिस के सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल, दस्तावेज, सीसीटीवी और पूछताछ से मिलने वाली जानकारियों को जोड़ने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जांच जारी है और किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।