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संबल योजना की राशि दिलाने के नाम पर रिश्वतखोरी! नगर निगम के दो कर्मचारी गिरफ्तार, जरूरतमंदों की मदद पर लगाया 'घूस' का दाग

 

मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी संबल योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इंदौर नगर निगम के दो कर्मचारियों ने मानवता और सरकारी जिम्मेदारी को शर्मसार करते हुए योजना का लाभ दिलाने के बदले रिश्वत की मांग की। मामला उजागर होने के बाद दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, संबल योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को संकट की घड़ी में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। लेकिन इंदौर नगर निगम में तैनात दो कर्मचारियों ने इस संवेदनशील योजना को कमाई का जरिया बना लिया। आरोप है कि उन्होंने पात्र हितग्राही से सहायता राशि जारी कराने के एवज में रिश्वत की मांग की।

पीड़ित ने कर्मचारियों की मांग से परेशान होकर मामले की शिकायत संबंधित एजेंसी से की। शिकायत की जांच के बाद कार्रवाई की गई और दोनों कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया गया। कार्रवाई के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया और पूरे मामले की चर्चा शुरू हो गई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कर्मचारी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर जरूरतमंद लोगों से अवैध वसूली करने का प्रयास कर रहे थे। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि संबल योजना उन परिवारों के लिए बनाई गई है जो पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रहे होते हैं। ऐसे लोगों से रिश्वत मांगना सरकारी व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक बिना किसी अवैध लेन-देन के पहुंचना चाहिए और इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं है।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय-समय पर निगरानी और सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसी घटनाएं जरूरतमंद लोगों का सरकारी योजनाओं से विश्वास कम कर सकती हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस तरह की अवैध वसूली में अन्य कर्मचारी भी शामिल थे। वहीं, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी योजना का लाभ दिलाने के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी तुरंत शिकायत करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।