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मध्यप्रदेश में BJP का नया प्रयोग, हर सांसद को मिलेगी केंद्र के एक मंत्रालय की जिम्मेदारी

 

मध्यप्रदेश में भाजपा केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए नया प्रयोग करने की तैयारी में है। इसके तहत प्रदेश के प्रत्येक भाजपा सांसद को केंद्र सरकार के एक-एक मंत्रालय के साथ समन्वय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई पार्टी की कोर ग्रुप की बैठक में यह सुझाव दिया। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की योजनाओं और परियोजनाओं का लाभ मध्यप्रदेश तक तेजी से पहुंचाना तथा लंबित मामलों के निराकरण में मदद करना है।

मुख्यमंत्री और अधिकारियों के साथ मिलकर करेंगे काम

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सांसदों को केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े मध्यप्रदेश के मामलों की जिम्मेदारी दी जा सकती है। संबंधित सांसद मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और राज्य के संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के साथ समन्वय करेंगे। इसके बाद वे दिल्ली में संबंधित केंद्रीय मंत्रालय से संपर्क कर प्रदेश से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।

इस व्यवस्था के जरिए केंद्र सरकार की योजनाओं, वित्तीय स्वीकृतियों और विभिन्न विकास परियोजनाओं से संबंधित मामलों की नियमित निगरानी की जा सकेगी। यदि किसी परियोजना या प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय मंत्रालय में प्रक्रिया लंबित है, तो संबंधित सांसद उसके बारे में जानकारी लेकर अधिकारियों के साथ समन्वय कर सकते हैं।

केंद्र की योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर

भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि मध्यप्रदेश को केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ कैसे दिलाया जाए। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मंत्रियों के नेतृत्व में विशेष टीमें बनाने की योजना पर विचार किया गया।

इन टीमों में संबंधित विभागों के मंत्री, सांसद और अधिकारी आपसी तालमेल के साथ काम करेंगे। पार्टी का उद्देश्य केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली दिक्कतों को दूर किया जा सके।

मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर भाजपा के सांसद

मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर भाजपा के सांसद हैं। ऐसे में पार्टी इस व्यवस्था के जरिए सांसदों के अनुभव और केंद्रीय मंत्रालयों से उनके संपर्क का इस्तेमाल राज्य से जुड़े विकास कार्यों में करना चाहती है। हालांकि, किस सांसद को किस मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो केंद्र सरकार के मंत्रालयों से जुड़े प्रदेश के मामलों के लिए जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, राज्य के विभागों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच संवाद का एक अतिरिक्त माध्यम तैयार होगा।

कोर ग्रुप की बैठक में कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा

सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के अलावा संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में राज्यसभा की रिक्त सीट के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा कर चार-पांच नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजने पर सहमति बनी। इसके अलावा समान नागरिक संहिता और प्रदेश सरकार के तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।