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भाजपा विधायक का सवाल- स्टे लेकर जमे अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते विभाग?

 

मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों में लंबे समय से एक ही पद पर जमे अधिकारियों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। भाजपा विधायक ने ऐसे अधिकारियों को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, जो तबादला आदेश के बाद कोर्ट से स्टे लेकर अपने पद पर बने हुए हैं। विधायक ने पूछा कि आखिर विभाग ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करता?

विधायक ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि तबादला होने के बाद कई अधिकारी न्यायालय से स्थगन आदेश यानी स्टे ले आते हैं और इसके बाद लंबे समय तक उसी पद पर बने रहते हैं। इससे विभागीय व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है।

तबादले के बाद स्टे लेकर पद पर बने रहने का मुद्दा

सरकारी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। जरूरत और विभागीय व्यवस्था के अनुसार कर्मचारियों की पोस्टिंग बदली जाती है। हालांकि, कई मामलों में तबादला आदेश के बाद संबंधित अधिकारी कोर्ट से राहत हासिल कर लेते हैं।

भाजपा विधायक का सवाल है कि यदि किसी अधिकारी का तबादला प्रशासनिक जरूरत के आधार पर किया गया है तो स्टे मिलने के बाद भी विभाग को मामले की प्रभावी पैरवी करनी चाहिए। लंबे समय तक स्टे के कारण अधिकारी पुराने पद पर बने रहते हैं और तबादला व्यवस्था का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।

विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल

विधायक ने विभागों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने अधिकारियों के लंबे समय तक एक ही जगह पदस्थ रहने और तबादला आदेशों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं पर ध्यान देने की मांग की।

उनका कहना है कि अगर विभाग समय पर न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखे और मामलों की नियमित समीक्षा करे तो लंबे समय तक स्टे की स्थिति से बचा जा सकता है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

प्रशासनिक व्यवस्था पर असर

तबादला होने के बावजूद अधिकारियों के एक ही पद पर बने रहने से विभागों में कई तरह की दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। नई जगह पदस्थ किए गए अधिकारी के जॉइन नहीं कर पाने से पद खाली रह सकता है या किसी अन्य अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है।

वहीं, लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने वाले अधिकारियों को लेकर भी सवाल उठते हैं। प्रशासनिक व्यवस्था में नियमित तबादलों का उद्देश्य अधिकारियों के अनुभव का अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोग करना और व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना होता है।

जवाबदेही तय करने की मांग

भाजपा विधायक ने इस मामले में विभागों से स्पष्ट नीति और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि तबादला आदेश के बाद स्टे लेने वाले अधिकारियों के मामलों की नियमित निगरानी होनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि किन मामलों में स्टे लंबे समय से जारी है और विभाग की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

इस मुद्दे के सामने आने के बाद अब संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर नजर रहेगी। यदि सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाती है तो लंबे समय से स्टे के आधार पर पदों पर जमे अधिकारियों के मामलों की समीक्षा की जा सकती है।