मूक-बधिर बच्चों के लिए बड़ी राहत: सरकार दे रही है 6 लाख रुपए का कॉक्लियर इम्प्लांट मुफ्त
जन्म से सुनने की क्षमता नहीं होने के कारण कई बच्चे बोलने में भी असमर्थ रहते हैं। ऐसे मूक-बधिर बच्चों के जीवन में सुनने और बोलने की क्षमता लौटाने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत ऐसे बच्चों को करीब 6 लाख रुपये की लागत वाला कॉक्लियर इम्प्लांट पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जन्मजात सुनने की समस्या से जूझ रहे बच्चों को सामान्य जीवन की ओर लाना है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत चयनित बच्चों की जांच और उपचार प्रक्रिया पूरी तरह सरकारी अस्पतालों के माध्यम से की जाती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जाती है।
यह तकनीक उन बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है, जो जन्म से या प्रारंभिक उम्र में सुनने की क्षमता खो चुके होते हैं। इम्प्लांट लगने के बाद नियमित थेरेपी और प्रशिक्षण से बच्चे धीरे-धीरे सुनने और बोलने की क्षमता विकसित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर पहचान और उपचार मिलने पर ऐसे बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है और वे सामान्य बच्चों की तरह शिक्षा और सामाजिक जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।
सरकारी योजना के तहत पात्र बच्चों का चयन स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर किया जाता है, जिसके बाद उन्हें यह महंगा उपचार बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराया जाता है।
इस पहल को बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिल रही है।