×

लाड़ली बहना योजना पर बड़ा सवाल: मप्र की 5 लाख विशेष पिछड़ी जनजाति की महिलाएं अब भी लाभ से वंचित

 

मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाड़ली बहना योजना’ को लेकर एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। प्रदेश की सहरिया, बैगा और भारिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) से जुड़ी करीब 5 लाख महिलाएं अब भी इस योजना के लाभ से वंचित हैं। बताया जा रहा है कि योजना की पात्रता से जुड़े एक नियम के कारण इन महिलाओं को सरकार की सबसे बड़ी महिला कल्याणकारी योजनाओं में शामिल नहीं किया जा सका है।

जानकारी के अनुसार, लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य प्रदेश की पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत हर महीने आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। हालांकि, विशेष पिछड़ी जनजातियों की बड़ी संख्या में महिलाएं अब तक इस योजना का लाभ नहीं ले पा रही हैं।

बताया जा रहा है कि योजना की पात्रता से संबंधित एक प्रावधान इन महिलाओं के लिए बाधा बन गया है। इसी कारण सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की बड़ी आबादी योजना से बाहर रह गई है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि ये समुदाय प्रदेश के सबसे कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों में शामिल हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ मिलना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन समुदायों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है, उन्हें कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में पात्रता नियमों की समीक्षा कर विशेष परिस्थितियों वाले समुदायों के लिए अलग व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठ रही है।

विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि योजना के नियमों में आवश्यक संशोधन कर विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को भी इसका लाभ दिया जाए। उनका कहना है कि इससे इन परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य को भी बल मिलेगा।

फिलहाल इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार पात्रता नियमों में किसी प्रकार का बदलाव करती है या नहीं। यदि नियमों में संशोधन होता है, तो प्रदेश की लाखों महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है।

लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल है। ऐसे में विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं के योजना से बाहर रहने का मुद्दा नीति और क्रियान्वयन, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।