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आयुष्मान में बड़ा खेल: शिविर लगाकर BP-शुगर के मरीज ढूंढे, क्लेम के लिए 7 दिन तक अस्पताल में रखा

 

मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के नाम पर फर्जीवाड़े का एक और गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ अस्पतालों ने शिविर लगाकर गांवों में बीपी और शुगर के मरीजों की पहचान की और उन्हें आयुष्मान योजना के तहत इलाज के नाम पर अस्पताल में भर्ती कराया। इतना ही नहीं, मरीजों को कथित तौर पर सात दिन तक अस्पताल में रखा गया, ताकि उनके नाम पर आयुष्मान योजना के तहत क्लेम किया जा सके।

इस मामले के सामने आने के बाद आयुष्मान योजना के तहत मरीजों की भर्ती और इलाज के नाम पर किए जाने वाले क्लेम की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी स्वास्थ्य योजना की राशि में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का मामला हो सकता है।

गांवों में शिविर लगाकर मरीजों की तलाश

जानकारी के मुताबिक, मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिए ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। इन शिविरों में ब्लड प्रेशर और शुगर की समस्या वाले लोगों की पहचान की गई।

इसके बाद मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने का भरोसा देकर अस्पताल लाए जाने का आरोप है। मरीजों के आयुष्मान कार्ड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उन्हें अस्पताल में भर्ती दिखाया गया।

क्लेम के लिए सात दिन भर्ती रखने का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि मरीजों को इलाज की वास्तविक जरूरत से ज्यादा समय तक अस्पताल में रखा गया। आरोप है कि आयुष्मान योजना के तहत क्लेम हासिल करने के लिए मरीजों को करीब सात दिन तक भर्ती रखा गया।

जांच में अब यह देखा जाना जरूरी है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में मरीजों की भर्ती किस बीमारी और किस उपचार के लिए दिखाई गई। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि मरीजों को वास्तव में कौन सा इलाज दिया गया और उनके नाम पर आयुष्मान योजना से कितनी राशि का क्लेम किया गया।

भोपाल और रायसेन के मामलों से जुड़ रहे तार

आयुष्मान योजना में फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाकर सरकारी राशि हासिल करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। भोपाल के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने और फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद अब रायसेन में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई है।

नए मामले ने इस आशंका को और मजबूत किया है कि कुछ अस्पताल आयुष्मान योजना के नियमों का दुरुपयोग कर रहे हैं। हालांकि पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

रिकॉर्ड की जांच से खुलेगा राज

जांच एजेंसियां अस्पतालों के भर्ती रजिस्टर, मरीजों के आयुष्मान कार्ड, मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, दवाओं और उपचार संबंधी दस्तावेजों की जांच कर सकती हैं। शिविरों में शामिल मरीजों से भी पूछताछ की जा सकती है कि उन्हें अस्पताल क्यों लाया गया और वहां कितने दिन रखा गया।

इसके अलावा आयुष्मान पोर्टल पर किए गए क्लेम और अस्पताल में दर्ज वास्तविक उपचार का मिलान किया जाएगा। इससे पता चल सकेगा कि मरीजों के नाम पर नियमों के मुताबिक क्लेम किया गया था या नहीं।

आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों को इलाज की सुविधा देने के लिए बनाई गई है। ऐसे में फर्जी तरीके से मरीज तैयार कर सरकारी राशि का क्लेम करने का आरोप बेहद गंभीर है। अब जांच के बाद ही सामने आएगा कि इस पूरे खेल में कितने अस्पताल और लोग शामिल हैं और सरकारी खजाने को कितना नुकसान पहुंचाया गया।