रेलवे भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा: CBI ने बिहार से दो युवकों को जबलपुर में किया गिरफ्तार
जबलपुर में रेलवे भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। CBI की जबलपुर टीम ने बिहार के मुंगेर जिले से दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो भर्ती परीक्षा में जाली दस्तावेज और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने गूगल से फोटो एडिट कर जाली दस्तावेज तैयार किए। इसके जरिए उन्होंने टेक्नीशियन पद की भर्ती में असली अभ्यर्थी की जगह उसके पड़ोसी को एग्जाम देने की व्यवस्था की। यह सौदा करीब छह लाख रुपए में हुआ।
मामले में यह ध्यान देने योग्य है कि फर्जीवाड़ा सिर्फ लिखित परीक्षा तक ही सीमित नहीं रहा। आरोपियों ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल जांच तक फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया। इसके चलते, अभ्यर्थी असली उम्मीदवार की जगह सभी प्रक्रियाओं में शामिल हो गया।
यह मामला सितंबर 2025 में सामने आया, जब अभ्यर्थी जॉइनिंग के बाद बायोमैट्रिक सत्यापन में फेल हो गया। जांच में पाया गया कि अंगूठा और चेहरा असली उम्मीदवार से मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद रेलवे प्रशासन की शिकायत पर CBI ने FIR दर्ज की और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की।
CBI की टीम ने बिहार से आरोपियों को पकड़कर जबलपुर कोर्ट में पेश किया। अदालत ने जांच में सहयोग करते हुए दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया। अधिकारियों ने बताया कि यह मामला रेलवे भर्ती परीक्षा में सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रियाओं की संवेदनशीलता को उजागर करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फर्जीवाड़े न केवल नियुक्ति प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं, बल्कि अन्य योग्य उम्मीदवारों के अवसरों पर भी असर डालते हैं। इसके अलावा, यह घटना तकनीकी सुरक्षा उपायों और बायोमैट्रिक सत्यापन की आवश्यकता को भी स्पष्ट करती है।
रेलवे भर्ती में फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपियों के खिलाफ जांच अब भी जारी है। CBI ने बताया कि आगे भी सभी शामिल व्यक्तियों की संपूर्ण पहचान और कनेक्शन की जांच की जाएगी। इस मामले से यह साफ हो गया कि ऑनलाइन दस्तावेज़ और फोटो एडिटिंग के जरिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा संभव है, लेकिन बायोमैट्रिक और सत्यापन प्रणाली इसे पकड़ने में सक्षम हैं।
इस घटना ने उम्मीदवारों और अधिकारियों के लिए चेतावनी के रूप में काम किया है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी तरह पारदर्शिता और सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। रेलवे भर्ती में इस प्रकार की धोखाधड़ी पर कड़ी कार्रवाई और गंभीर जांच की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।