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भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने परिसर को माना वाग्देवी मंदिर, प्रबंधन पर ASI और केंद्र को निर्णय का निर्देश

 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए इसे वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर के रूप में मान्यता दी है। शुक्रवार को दिए गए इस फैसले ने लंबे समय से चल रहे भोजशाला विवाद में एक नई दिशा जोड़ दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि परिसर के प्रबंधन और संचालन को लेकर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को लेना होगा।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि परिसर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रकृति को ध्यान में रखते हुए इसके प्रशासनिक ढांचे पर पुनर्विचार आवश्यक है। साथ ही अदालत ने यह भी संकेत दिया कि 1958 के प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958) के तहत भोजशाला परिसर का संपूर्ण संरक्षण और प्रबंधन ASI के अधीन ही आता है।

इस फैसले को क्षेत्र में ऐतिहासिक महत्व का माना जा रहा है, क्योंकि भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक दावों के कारण चर्चा में रहा है। एक पक्ष इसे देवी वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे ऐतिहासिक मस्जिद परिसर के रूप में देखता रहा है। हाईकोर्ट के ताज़ा निर्णय ने इस विवाद में एक नई कानूनी स्थिति पैदा कर दी है।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि परिसर के संरक्षण और उपयोग को लेकर सभी निर्णय कानून के दायरे में रहकर लिए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार के टकराव या तनाव की स्थिति से बचा जा सके। साथ ही केंद्र सरकार और ASI को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे एक संतुलित और पारदर्शी प्रबंधन मॉडल तैयार करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न केवल भोजशाला विवाद के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देश में अन्य ऐतिहासिक धरोहर स्थलों के प्रबंधन और कानूनी स्थिति पर भी प्रभाव डाल सकता है। ASI की भूमिका को अदालत द्वारा पुनः रेखांकित किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि संरक्षित स्मारकों के संचालन में केंद्रीय एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

स्थानीय स्तर पर इस निर्णय को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक न्याय के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इस तरह के मामलों में सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।

फिलहाल, सभी की नजरें केंद्र सरकार और ASI के अगले कदम पर टिकी हैं, जो इस परिसर के भविष्य के प्रबंधन की रूपरेखा तय करेंगे। यह मामला आने वाले दिनों में और भी कानूनी और प्रशासनिक चर्चाओं का केंद्र बना रह सकता है।