भोजशाला में 700 साल बाद बड़ा बदलाव, वीडियो में जाने नमाज नहीं, सिर्फ पूजा, वाग्देवी की स्थापना से माहौल गरमाया
मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां करीब 700 साल बाद शुक्रवार को परिसर में नमाज नहीं पढ़ी गई, बल्कि केवल धार्मिक पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। यह बदलाव स्थानीय प्रशासनिक और न्यायिक घटनाक्रम के बाद सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव और उत्सुकता दोनों बढ़ा दी है।भोज उत्सव समिति की ओर से शुक्रवार को परिसर में वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत दर्शन-पूजन कराया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे, जिससे परिसर में भीड़ का माहौल बना रहा। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान वातावरण भक्तिमय नजर आया और पूजा-पाठ में स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस अवसर पर वाग्देवी मंदिर में कारसेवकों के परिजनों का सम्मान भी किया गया, जिसे आयोजन समिति ने एक भावनात्मक और प्रतीकात्मक कदम बताया। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा रखा गया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को दिए अपने आदेश में भोजशाला को मंदिर घोषित किया था। इस फैसले के बाद क्षेत्र में लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने व्यवस्था को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी है और विभिन्न गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
फैसले के विरोध में मुस्लिम समाज की ओर से भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की और अपने विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया। साथ ही कई जगहों पर दुकानें भी बंद रखी गईं, जिससे क्षेत्र में सामान्य जनजीवन पर आंशिक असर पड़ा।स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। लगभग 2 हजार पुलिसकर्मियों को क्षेत्र में तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की तनावपूर्ण स्थिति को रोका जा सके। संवेदनशीलता को देखते हुए सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है और अफवाहों पर रोक लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर भोजशाला का यह घटनाक्रम धार्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गया है, जहां एक ओर पूजा-पाठ का आयोजन हुआ तो दूसरी ओर विरोध और सुरक्षा के सख्त इंतजाम भी देखने को मिले।