2600 करोड़ के उज्जैन-गरोठ हाईवे पर बड़ा मामला, ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही धंसा 500 मीटर हिस्सा; तोड़कर दोबारा बनाना पड़ेगा
मध्य प्रदेश में 2600 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे उज्जैन-गरोठ हाईवे के निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाईवे पर यातायात शुरू होने से पहले ही देवास रोड से लगा करीब 500 मीटर का हिस्सा धंस गया। स्थिति इतनी खराब हो गई कि इस हिस्से को पूरी तरह तोड़कर दोबारा बनाने की नौबत आ गई है। इस मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों और निर्माण कंपनी जीएचवी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
इतनी बड़ी लागत से तैयार किए जा रहे हाईवे पर निर्माण पूरा होने से पहले ही सड़क का धंसना चिंताजनक माना जा रहा है। आमतौर पर किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग को यातायात के लिए खोलने से पहले उसकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा से जुड़े तकनीकी परीक्षण किए जाते हैं। ऐसे में ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही सड़क का एक बड़ा हिस्सा खराब होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
500 मीटर सड़क धंसने से बढ़ी परेशानी
उज्जैन-गरोठ हाईवे पर देवास रोड के नजदीक करीब 500 मीटर का हिस्सा धंसने की जानकारी सामने आई है। सड़क के इस हिस्से में आई खराबी के बाद इसे सामान्य मरम्मत से ठीक करना संभव नहीं माना गया। इसके चलते पूरे प्रभावित हिस्से को तोड़कर नए सिरे से निर्माण करने की स्थिति बन गई है।
इस तरह की समस्या सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, जमीन की स्थिति, मिट्टी की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
2600 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल
उज्जैन-गरोठ हाईवे का निर्माण करीब 2600 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। इतनी बड़ी परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखना एनएचएआई और संबंधित निर्माण कंपनी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हाईवे का उद्देश्य बेहतर सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और यात्रियों के सफर को आसान बनाना है। लेकिन यातायात शुरू होने से पहले ही सड़क का धंसना परियोजना की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है।
एनएचएआई और निर्माण कंपनी की जवाबदेही पर चर्चा
इस मामले में एनएचएआई के अधिकारियों और निर्माण कंपनी जीएचवी की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान सड़क की मजबूती और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी होता है। इसके लिए समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण किए जाते हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सड़क का 500 मीटर हिस्सा आखिर किन कारणों से धंसा और निर्माण के दौरान इस खामी का पता क्यों नहीं चला। साथ ही दोबारा निर्माण पर होने वाले खर्च और जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
फिलहाल इस मामले में तकनीकी जांच और संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही निर्माण में गड़बड़ी के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। करोड़ों रुपए की इस परियोजना में सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और सरकारी धन की जवाबदेही तय करना महत्वपूर्ण होगा।