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किसानों को बड़ा झटका: मिट्टी और बीज जांच सेवाएं अब लोक सेवा गारंटी से बाहर, रिपोर्ट मिलने की तय समय-सीमा खत्म

 

राज्य सरकार ने खेती-किसानी से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब मिट्टी के नमूनों की जांच और बीज के सर्विस सैंपल की पड़ताल के लिए कोई निर्धारित समय-सीमा लागू नहीं होगी। यानी किसानों को इन जांच रिपोर्टों के लिए पहले की तरह तय अवधि में सेवा मिलने की गारंटी नहीं रहेगी।

इस संबंध में लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर नए प्रावधान लागू कर दिए हैं। सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन किसानों पर पड़ेगा, जो फसल की बुवाई, उर्वरक प्रबंधन और बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इन जांच सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।

दो अहम सेवाएं हुईं अधिनियम से बाहर

नोटिफिकेशन के मुताबिक, जिन सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से हटाया गया है, उनमें मिट्टी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच और बीज के सर्विस सैंपल की जांच शामिल हैं। अब इन सेवाओं के लिए संबंधित विभाग पर निर्धारित समय में रिपोर्ट जारी करने की कानूनी बाध्यता नहीं होगी।

किसानों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान अपनी भूमि के अनुसार उर्वरकों का चयन करते हैं, जबकि बीज जांच से बीज की गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता का पता चलता है। यदि रिपोर्ट मिलने में देरी होती है तो इसका असर बुवाई के समय और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।

क्या है लोक सेवा गारंटी अधिनियम?

लोक सेवा गारंटी अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाएं तय समय-सीमा में उपलब्ध कराना है। यदि निर्धारित समय में सेवा नहीं मिलती, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जा सकती है। लेकिन इन दोनों कृषि सेवाओं को अधिनियम से बाहर किए जाने के बाद अब इन पर समयबद्ध सेवा का प्रावधान लागू नहीं रहेगा।

गजट नोटिफिकेशन जारी

लोक सेवा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के साथ यह व्यवस्था प्रभावी हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से इस निर्णय के पीछे प्रशासनिक या तकनीकी कारणों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि खेती से संबंधित सेवाओं में समयबद्धता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नई व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में सामने आएगा, खासकर उन किसानों पर जो फसल की तैयारी के दौरान मिट्टी और बीज जांच रिपोर्ट पर निर्भर रहते हैं।