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रीवा के गुढ़ में भाजपा को बड़ा झटका, 10 पार्षदों ने दिया सामूहिक इस्तीफा; अध्यक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोप

 

मध्य प्रदेश के रीवा जिले की गुढ़ नगर परिषद में अध्यक्ष और पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब भाजपा संगठन तक पहुंच गया है। नगर परिषद के 10 भाजपा पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। पार्षदों ने रीवा पहुंचकर भाजपा जिला अध्यक्ष बीरेंद्र गुप्ता को अपना इस्तीफा सौंपा। हालांकि, यह इस्तीफा पार्षद पद से नहीं बल्कि भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से दिया गया है।

अध्यक्ष अर्चना सिंह पर लगाए गंभीर आरोप

सामूहिक इस्तीफा देने वाले पार्षदों ने नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्षदों का आरोप है कि परिषद के कामकाज में मनमानी की गई और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने अध्यक्ष के पूरे कार्यकाल की जांच कराने की मांग भी पहले उठाई थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पार्षदों की ओर से अध्यक्ष पर भ्रष्टाचार, मनमानी और परिषद के विकास कार्यों से जुड़े फैसलों में अनियमितता के आरोप लगाए जाते रहे हैं। जुलाई में भी 13 पार्षदों ने अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की थी।

पांच पार्षदों पर केस दर्ज कराने का भी आरोप

पार्षदों ने अध्यक्ष पर विरोध करने वाले पांच पार्षदों के खिलाफ कथित तौर पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि परिषद के कामकाज को लेकर सवाल उठाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। यह आरोप भी पार्षदों की ओर से लगाए गए हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

लंबे समय से चल रहा है विवाद

गुढ़ नगर परिषद में अध्यक्ष और पार्षदों के बीच विवाद पिछले कई महीनों से जारी है। जुलाई में 13 पार्षद अध्यक्ष के खिलाफ एकजुट हुए थे और अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू करने की बात सामने आई थी। पार्षदों ने परिषद के कामकाज और विकास कार्यों की जांच की मांग भी की थी। इसके बाद से मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा में बना हुआ है।

अब भाजपा संगठन के फैसले पर नजर

सामूहिक इस्तीफे के बाद गुढ़ नगर परिषद का विवाद और गहरा गया है। अब भाजपा संगठन इन इस्तीफों पर क्या फैसला लेता है और अध्यक्ष के खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है, इस पर नजर रहेगी। वहीं, परिषद के कामकाज को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच या संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।