×

भोपाल की 92 करोड़ की एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का मामला: 'ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक' में DRI ने किया था बड़ा खुलासा

 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 16 अगस्त 2025 को डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जगदीशपुर क्षेत्र में संचालित अवैध ड्रग्स फैक्ट्री का पर्दाफाश किया था। 'ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक' नाम से चलाए गए इस अभियान में मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था।

DRI की टीम ने छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से करीब 61.2 किलोग्राम मेफेड्रोन (MD) बरामद की थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 92 करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी सिंथेटिक ड्रग्स जब्ती की घटनाओं में शामिल मानी गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, फैक्ट्री में अवैध रूप से मेफेड्रोन का निर्माण किया जा रहा था। यह एक प्रतिबंधित सिंथेटिक नशीला पदार्थ है, जिसकी तस्करी देश के विभिन्न राज्यों तक किए जाने की आशंका जताई गई थी। छापेमारी के दौरान ड्रग्स के साथ-साथ इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायन, मशीनें और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसियों ने ड्रग्स के उत्पादन, सप्लाई चेन और इससे जुड़े लोगों की पहचान के लिए विस्तृत जांच शुरू की थी। कार्रवाई के बाद कई संदिग्धों से पूछताछ की गई और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, मेफेड्रोन, जिसे आम बोलचाल में एमडी ड्रग्स भी कहा जाता है, एक खतरनाक सिंथेटिक नशीला पदार्थ है। इसका सेवन करने से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि इसके उत्पादन, बिक्री और तस्करी पर कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है।

'ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक' को DRI की बड़ी सफलताओं में गिना गया। इस कार्रवाई ने यह भी संकेत दिया कि मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियां लगातार निगरानी और सख्त अभियान चला रही हैं।

जांच एजेंसियां अब भी इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का उद्देश्य ड्रग्स नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाकर इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। वहीं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे, ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके।