भोपाल-नागपुर हाईवे निर्माण पर फिर संकट: बरेठा घाट और केसला-बागदेव हिस्से में वन विभाग ने लगाया नया पेच
भोपाल-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-46 के निर्माण को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। राजमार्ग के सबसे संवेदनशील हिस्सों में शामिल बरेठा घाट और केसला-बागदेव क्षेत्र में प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण पर अब वन विभाग की आपत्तियों के कारण नया अड़ंगा लग गया है।
चार लेन सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले वन विभाग की मंजूरी और अन्य औपचारिकताओं को लेकर मामला उलझ गया है।
वन क्षेत्र में निर्माण को लेकर आपत्ति
जानकारी के अनुसार, एनएच-46 के इन हिस्सों में सड़क निर्माण के लिए वन क्षेत्र से जुड़ी जमीन और पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर अनुमति की जरूरत है। वन विभाग ने निर्माण कार्य को लेकर कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई है।
इसके चलते परियोजना की गति प्रभावित हो सकती है और निर्माण कार्य में देरी की आशंका बढ़ गई है।
बरेठा घाट और केसला-बागदेव हैं संवेदनशील क्षेत्र
भोपाल-नागपुर मार्ग पर बरेठा घाट और केसला-बागदेव का इलाका भौगोलिक और पर्यावरणीय दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाता है।घाट क्षेत्र होने के कारण यहां सड़क निर्माण में तकनीकी चुनौतियां भी हैं। इसके अलावा वन क्षेत्र से गुजरने के कारण पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी है।
यात्रियों को मिल सकती है बेहतर सुविधा
फोरलेन निर्माण पूरा होने के बाद भोपाल और नागपुर के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है। इससे यात्रा का समय कम होगा और सड़क सुरक्षा में भी सुधार आएगा।लेकिन वन विभाग की नई आपत्तियों के कारण परियोजना की समयसीमा पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों के बीच चल रही बातचीत
सड़क निर्माण से जुड़े विभाग और वन विभाग के अधिकारियों के बीच मामले को सुलझाने के लिए बातचीत चल रही है। प्रयास किया जा रहा है कि पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जा सके।फिलहाल परियोजना से जुड़े अधिकारियों की नजर वन विभाग की मंजूरी और आगे की प्रक्रिया पर है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो हाईवे निर्माण में और देरी हो सकती है।