भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 62,500 प्रतिष्ठानों पर आ सकता है फैसला
भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में शहर के करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों का भविष्य तय होने की संभावना है। मामला आवासीय क्षेत्रों में कारोबार संचालित किए जाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नगर निगम के साथ-साथ बड़ी संख्या में कारोबारियों और रहवासियों की नजर बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के फैसले के बाद भोपाल नगर निगम ने शहरभर में आवासीय क्षेत्रों में संचालित हो रहे प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद नगर निगम की ओर से कई स्थानों पर कार्रवाई की गई। निगम ने अपनी ओर से अब तक की कार्रवाई को लेकर एक्शन टेकन रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दी है।
नगर निगम की रिपोर्ट में अब तक की गई कार्रवाई और आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित जानकारी शामिल है। निगम की ओर से यह बताया गया है कि आदेश के बाद किस तरह की कार्रवाई की गई और संबंधित प्रतिष्ठानों को लेकर क्या कदम उठाए गए।
वहीं, दूसरी ओर रहवासियों की ओर से नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। रहवासी पक्ष का दावा है कि जिन प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीलिंग कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है, उनमें से कई मामलों में कार्रवाई वास्तविक नहीं थी। रहवासी पक्ष मंगलवार की सुनवाई के दौरान इससे संबंधित रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करने की तैयारी में है।
इस मामले में कुल 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों का आंकड़ा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इनमें अलग-अलग प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि इन प्रतिष्ठानों के संबंध में आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर भोपाल में लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। कई इलाकों में घरों के साथ दुकानें, कार्यालय और अन्य व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं। इससे पार्किंग, यातायात, सुरक्षा और रहवासी क्षेत्रों के स्वरूप को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। दूसरी ओर कारोबारियों का तर्क रहा है कि कई प्रतिष्ठान लंबे समय से संचालित हैं और अचानक कार्रवाई होने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो सकता है।
5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम की कार्रवाई तेज हुई थी। निगम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए, जो आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे थे। इसके बाद सीलिंग और अन्य कार्रवाई को लेकर विवाद भी सामने आया।
अब मंगलवार की सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने रिकॉर्ड और दावे सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे। नगर निगम अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश कर चुका है, जबकि रहवासी पक्ष कथित सीलिंग कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज पेश करेगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का रुख इस पूरे मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है। 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों से जुड़े इस मामले में आने वाला फैसला भोपाल के रहवासी और व्यावसायिक क्षेत्रों पर व्यापक असर डाल सकता है।