भोपाल के विकास पर उठा बड़ा सवाल, सांसद आलोक शर्मा ने टीएंडसीपी अधिकारियों को लगाई फटकार
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के विकास को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पिछले दो दशकों से शहर का विस्तार और विकास बिना किसी ठोस और दीर्घकालिक कार्ययोजना के होने का मुद्दा शुक्रवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में प्रमुखता से उठा। बैठक के दौरान सांसद आलोक शर्मा ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
बैठक में शहर के विकास कार्यों, अधोसंरचना परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा की गई। इसी दौरान यह बात सामने आई कि राजधानी के विकास के लिए लंबे समय से कोई व्यापक और प्रभावी मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया है। इसके चलते कई क्षेत्रों में अव्यवस्थित विकास, यातायात की समस्याएं और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
सांसद आलोक शर्मा ने अधिकारियों से सवाल किया कि राजधानी जैसे महत्वपूर्ण शहर का विकास बिना स्पष्ट कार्ययोजना के कैसे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण को देखते हुए योजनाबद्ध विकास की आवश्यकता है, लेकिन संबंधित विभाग इस दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि शहर के विस्तार, सड़क नेटवर्क, जल निकासी, सार्वजनिक परिवहन, हरित क्षेत्र और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करना समय की मांग है। यदि विकास कार्य बिना समन्वित योजना के जारी रहे, तो भविष्य में नागरिकों को और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सांसद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजधानी के विकास से जुड़े लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाए और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने विकास परियोजनाओं की नियमित निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने विभिन्न विकास परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी दी और भरोसा दिलाया कि शहर के समग्र विकास के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, जनप्रतिनिधियों ने इस बात पर बल दिया कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित होना चाहिए।
राजधानी भोपाल के सुनियोजित विकास का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र को देखते हुए आधुनिक और वैज्ञानिक शहरी नियोजन अपनाना बेहद जरूरी है। ऐसे में दिशा समिति की बैठक में उठे सवाल और सांसद की नाराजगी आने वाले समय में शहर की विकास नीति पर असर डाल सकती है।