महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: तड़के 4 बजे खुले मंदिर के पट, पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार, 2 नवंबर को तड़के भस्म आरती के दौरान भक्तिमय माहौल रहा। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोले गए। पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर विधि-विधान से अभिषेक किया गया।
जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल को दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच पंचामृत अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। जटाधारी भगवान को विभिन्न आभूषणों से सजाकर राजा स्वरूप प्रदान किया गया।
पंचामृत से किया अभिषेक
भस्म आरती की शुरुआत मंदिर के पारंपरिक पूजन विधान के साथ हुई। गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं के पूजन के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक हुआ। धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचामृत में दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस का उपयोग किया जाता है।अभिषेक के बाद भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को आभूषण धारण कराए गए और उनका दिव्य स्वरूप सजाया गया। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
भस्म आरती में उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देशभर में प्रसिद्ध है। प्रतिदिन सुबह 4 बजे होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान महाकाल का पूजन किया जाता है।मंदिर की आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार भस्म आरती सुबह 4 बजे से 6 बजे तक होती है।
राजा स्वरूप में भक्तों को देते हैं दर्शन
श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल का भव्य स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा। आभूषणों से सजे बाबा महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने जय श्री महाकाल के जयकारे लगाए। महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त पहुंचते हैं। यह आरती उज्जैन की धार्मिक पहचान और सदियों पुरानी पूजा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।