भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: 36 मौतों के जिम्मेदार अफसरों की जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश, रिटायर जज की अध्यक्षता में हुआ था आयोग
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई 36 लोगों की मौतों के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। अब आयोग ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष पेश कर दी है।
दूषित पानी की वजह से हुई मौतों के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं।
रिटायर जज की अध्यक्षता में बना था आयोग
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वतंत्र जांच के लिए रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया था। आयोग को पूरे घटनाक्रम की जांच करते हुए यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी कि दूषित पानी की समस्या कैसे पैदा हुई और इसे रोकने में संबंधित विभागों तथा अधिकारियों की ओर से कोई लापरवाही हुई या नहीं।
आयोग ने घटना से जुड़े दस्तावेजों, अधिकारियों की भूमिका और मौके की परिस्थितियों सहित विभिन्न पहलुओं की जांच की। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर दी गई है।
अब रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की सुनवाई
जांच आयोग की रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश होने के बाद अब अदालत इसके निष्कर्षों पर विचार करेगी। रिपोर्ट में यदि किसी अधिकारी या विभाग की लापरवाही सामने आती है तो अदालत आगे की कार्रवाई को लेकर उचित निर्देश दे सकती है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की गई है। दूषित पानी से हुई मौतों के कारणों के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर हुई संभावित चूक भी इस मामले में महत्वपूर्ण है।
पेयजल व्यवस्था पर उठे थे सवाल
भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद पेयजल आपूर्ति की निगरानी, पाइपलाइन व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठे थे। इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आई थी।
अब जांच आयोग की रिपोर्ट अदालत के सामने आने के बाद इस मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। हाई कोर्ट रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद आगे के निर्देश जारी करेगा।