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UN में बंशीलाल बोले- सभी देश समय पर अंशदान दें: विकासशील देशों पर अतिरिक्त वित्तीय भार न पड़े, 5.6 अरब रुपये के बकाया का मुद्दा भी उठाया

 

संयुक्त राष्ट्र (UN) में बंशीलाल ने सभी सदस्य देशों से संगठन के लिए निर्धारित अंशदान समय पर जमा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों और विकास संबंधी कार्यक्रमों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी देशों की वित्तीय जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। साथ ही, यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि वित्तीय संकट का अतिरिक्त बोझ विकासशील देशों पर न पड़े।

बैठक के दौरान करीब 5.6 अरब रुपये के बकाया अंशदान का मुद्दा भी उठाया गया। इस विषय पर चर्चा करते हुए समय पर भुगतान और सदस्य देशों के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों के उचित बंटवारे की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

समय पर अंशदान जमा करने की अपील

बंशीलाल ने अपने संबोधन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन के प्रभावी संचालन के लिए सदस्य देशों का नियमित वित्तीय सहयोग आवश्यक है। अंशदान में देरी होने से संगठन के बजट, कार्यक्रमों और विभिन्न गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने सभी देशों से अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और तय समयसीमा के भीतर भुगतान करने का आग्रह किया। नियमित अंशदान से संयुक्त राष्ट्र को अपने निर्धारित कार्यक्रमों और विकास संबंधी योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

विकासशील देशों पर न पड़े अतिरिक्त बोझ

संबोधन में विकासशील देशों की आर्थिक परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण बताया गया। बंशीलाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की वित्तीय चुनौतियों का समाधान इस तरह निकाला जाना चाहिए कि सीमित संसाधनों वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न बने।

विकासशील देशों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में भी संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में वित्तीय जिम्मेदारियों के निर्धारण और उनके क्रियान्वयन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

5.6 अरब रुपये के बकाया का मुद्दा

बैठक में 5.6 अरब रुपये के बकाया अंशदान का मुद्दा उठना संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय व्यवस्था के संदर्भ में अहम माना जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि यह बकाया किस अवधि का है, किन सदस्य देशों से संबंधित है और इसकी गणना किस मुद्रा या विनिमय दर के आधार पर की गई है।

संयुक्त राष्ट्र का बजट सदस्य देशों के निर्धारित अंशदान और अन्य वित्तीय स्रोतों से जुड़ा होता है। भुगतान में देरी होने पर संगठन के लिए अपने खर्च और कार्यक्रमों की योजना बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

वित्तीय जवाबदेही पर जोर

बंशीलाल के बयान का प्रमुख संदेश यही रहा कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग और वित्तीय जवाबदेही जरूरी है। समय पर अंशदान जमा करने के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि वित्तीय व्यवस्था सभी देशों की परिस्थितियों को ध्यान में रखे।

इस मुद्दे पर आगे की स्थिति संयुक्त राष्ट्र की संबंधित बैठक के आधिकारिक विवरण और बकाया अंशदान से जुड़े आंकड़ों के आधार पर स्पष्ट हो सकेगी।