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रतलाम में बैंक कर्मचारी ने 40 ग्राहकों को लगाया 85 लाख का चूना, फर्जी तरीके से तुड़वाई एफडी; पुलिस जांच में जुटी

 

जिले के लक्कड़पीठा स्थित यूको बैंक में धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। बैंक के एक आउटसोर्स कर्मचारी पर आरोप है कि उसने करीब 40 ग्राहकों के साथ ठगी कर उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वा दी और 85 लाख रुपये से अधिक की राशि हड़प ली। मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, आरोपी कर्मचारी बैंक में आउटसोर्स के माध्यम से काम करता था। आरोप है कि उसने ग्राहकों का विश्वास जीतकर उनकी एफडी और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद उसने कथित रूप से ग्राहकों को गुमराह कर उनकी एफडी समय से पहले तुड़वा दी और रकम अपने कब्जे में ले ली।

जब कुछ ग्राहकों को अपनी जमा राशि में गड़बड़ी का पता चला तो उन्होंने बैंक प्रबंधन से शिकायत की। जांच के दौरान कई खातों में अनियमितताएं सामने आईं। प्रारंभिक जांच में पता चला कि करीब 40 ग्राहक इस धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं और कुल रकम 85 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक अधिकारियों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। आरोपी कर्मचारी की भूमिका, पैसे के लेनदेन और ठगी के तरीके की जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में आरोपी ने अकेले वारदात को अंजाम दिया या फिर कोई अन्य व्यक्ति भी इसमें शामिल था। इसके अलावा बैंक के रिकॉर्ड, दस्तावेज और ग्राहकों के खातों की जांच की जा रही है।

घटना के बाद बैंक ग्राहकों में चिंता का माहौल है। लोगों ने बैंकिंग व्यवस्था में सुरक्षा और कर्मचारियों की निगरानी को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्राहकों का कहना है कि बैंक में जमा उनकी जीवनभर की कमाई के साथ इस तरह की धोखाधड़ी गंभीर मामला है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

बैंक प्रबंधन की ओर से ग्राहकों को आश्वासन दिया गया है कि मामले की जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रतलाम में सामने आया यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की निगरानी और ग्राहकों की वित्तीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस ठगी में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और ग्राहकों की रकम की वापसी को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।