3 अगस्त से शुरू होंगी बाबा महाकाल की श्रावण-भादौ सवारियां, पांच पारंपरिक और एक राजसी सवारी निकलेगी
विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भादौ माह में निकलने वाली पारंपरिक सवारियों का सिलसिला 3 अगस्त से शुरू होगा। इस वर्ष श्रद्धालुओं को कुल पांच पारंपरिक सवारियों के साथ एक राजसी सवारी के दर्शन होंगे। मंदिर प्रशासन ने सवारी को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं, वहीं सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, इस बार निकलने वाली पांच पारंपरिक सवारियां लगभग चार किलोमीटर के निर्धारित मार्ग से होकर गुजरेंगी। वहीं राजसी सवारी सात किलोमीटर के विस्तृत मार्ग पर निकाली जाएगी। सवारी के दौरान भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलेंगे और श्रद्धालु विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा व आरती कर उनका स्वागत करेंगे।
श्रावण मास में निकलने वाली महाकाल की सवारी उज्जैन की सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित धार्मिक परंपराओं में शामिल है। सवारी में भगवान महाकाल विभिन्न स्वरूपों में रजत पालकी पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दौरान शहर का धार्मिक वातावरण भक्तिमय हो जाता है और देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, सवारी मार्ग पर बैरिकेडिंग, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, साफ-सफाई और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन भी भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष योजना पर काम कर रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सवारी में पारंपरिक बैंड, अखाड़ों के प्रदर्शन, भजन-कीर्तन और धार्मिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा बाबा महाकाल की सवारी का स्वागत विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा किया जाएगा। मार्ग में कई स्थानों पर पुष्पवर्षा और महाआरती का आयोजन भी होगा।
श्रावण और भादौ माह में निकलने वाली महाकाल की सवारी का धार्मिक महत्व बेहद विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इन सवारियों के दौरान स्वयं भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इसी कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनने उज्जैन पहुंचते हैं।
मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और सवारी के दौरान निर्धारित व्यवस्था का सहयोग करें, ताकि यह धार्मिक आयोजन सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।